अमेरिका से प्रीडेटर ड्रोन की डील आखिरी दौर में: 35 घंटे तक हवा में रह सकता है यह एडवांस्ड ड्रोन, MQ-9B से भ… – Dainik Bhaskar

नई दिल्ली9 घंटे पहले

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भारतीय सेना के बेड़े में जल्द MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन शामिल होने वाला है। तीन अरब डॉलर यानी 22,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले 30 प्रीडेटर आर्म्ड ड्रोन को खरीदने के लिए भारत और अमेरिका के बीच बातचीत आखिरी दौर में हैं। हालांकि कुछ मुद्दों को सुलझाया जाना बाकी है। लंबे समय तक हवा में रहने वाले इस ड्रोन से सुरक्षाबलों की ताकत में काफी इजाफा होगा।

जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉर्पोरेशन के चीफ एग्जीक्यूटिव डॉ. विवेक लाल ने बताया कि दोनों सरकारों के बीच खरीदारी पर बातचीत लास्ट फेज में है। अमेरिकी कंपनी ‘जनरल एटॉमिक्स’ ने यह ड्रोन बनाए हैं। इन 30 ड्रोन को चीन के साथ लगने वाली लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) और भारत की समुद्री सीमा में सर्विलांस और सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

कश्मीर के पहाड़ी इलाकों पर नजर रखने के लिए इंडियन आर्मी फिलहाल, इजराइल से खरीदे गए ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रही है। लेकिन, अमेरिका के प्रिडेटर जेट की रफ्तार से उड़ते हैं। इन ड्रोन्स के मिलने के बाद भारत पाकिस्तान और चीन पर आसानी से नजर रख सकेगा।

कश्मीर के पहाड़ी इलाकों पर नजर रखने के लिए इंडियन आर्मी फिलहाल, इजराइल से खरीदे गए ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रही है। लेकिन, अमेरिका के प्रिडेटर जेट की रफ्तार से उड़ते हैं। इन ड्रोन्स के मिलने के बाद भारत पाकिस्तान और चीन पर आसानी से नजर रख सकेगा।

इसी ड्रोन से किया गया था अल-जवाहिरी का खात्मा
इन सभी ड्रोन को तीनों सेनाओं के लिए खरीदा जा रहा है। MQ-9B ड्रोन MQ-9 ‘रीपर’ का दूसरा वर्जन है। पिछले महीने इसका इस्तेमाल काबुल में हेलफायर मिसाइल के एक मोडिफाइड वर्जन को दागने के लिए किया गया था। इसमें अल-कायदा नेता अयमान अल-जवाहिरी की मौत हो गई थी। माना जाता है कि अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को खोजने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया था। हालांकि, तब इसका पुराना वर्जन इस्तेमाल किया गया था। भारत जिस वर्जन को खरीदने जा रहा है उसे दुनिया का मोस्ट एडवांस्ड ड्रोन कहा जाता है।

35 घंटे हवा में रह सकता
यह ड्रोन करीब 35 घंटे हवा में रह सकता है। यह फुली रिमोट कंट्रोल है। इसके लिए दो लोगों की जरूरत पड़ती है। यह एक बार उड़ान भरने के बाद 1900 किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी कर सकता है। सूत्रों के अनुसार यह एक घंटे में 482 किलोमीटर उड़ सकता है। इसके पंखों की लंबाई 65 फीट 7 इंच और इसकी ऊंचाई 12 फीट 6 इंच होती है।

प्रीडेटर को नेक्स्ट जेनरेशन ड्रोन कहा जाता है। तय वक्त में जमीन और समंदर दोनों में मिलिट्री मिशन को अंजाम दे सकता है। खास बात यह है कि इजराइल और अमेरिका के अलावा किसी और के पास इतने बेहतरीन और एडवांस्ड ड्रोन नहीं हैं।

प्रीडेटर को नेक्स्ट जेनरेशन ड्रोन कहा जाता है। तय वक्त में जमीन और समंदर दोनों में मिलिट्री मिशन को अंजाम दे सकता है। खास बात यह है कि इजराइल और अमेरिका के अलावा किसी और के पास इतने बेहतरीन और एडवांस्ड ड्रोन नहीं हैं।

2020 में इंडियन नेवी ने निगरानी के लिए MQ-9B को लीज पर लिया था
2020 में इंडियन नेवी को हमारी समुद्री सीमा की निगरानी के लिए अमेरिका से दो ‘MQ-9B’ सी गार्डियन ड्रोन एक साल के लिए लीज पर मिले थे। बाद में लीज टाइम बढ़ा दिया गया। इसे निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन के ठिकानों को बर्बाद करने सहित कई चीजों के लिए तैनात किया जा सकता है।

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