वैक्सीनेशन स्पीड बढ़ाने के लिए प्राइवेट अस्पतालों को जोड़ा लेकिन सुस्त पड़ी रफ्तार, जानें क्या है वजह – Navbharat Times

हाइलाइट्स:

  • अप्रैल के अंत तक 5000 सेंटर पर लग रही थी वैक्सीन, अब 1300-1700 पर सिमटी
  • कई प्राइवेट अस्पतालों ने वैक्सीन की रेगुलर सप्लाई में कमी से रोका वैक्सीनेशन
  • सरकार ने कुल उपलब्‍ध वैक्‍सीन में से 25% निजी क्षेत्र के लिए रिजर्व कर रखी हैं

नई दिल्ली
देश में कोरोना महामारी से वैक्सीनेशन तेज करने में प्राइवेट अस्पतालों को जोड़ने की पॉलिसी का जो चाहिए वो असर नहीं दिख रहा है। नई वैक्सीनेशन पॉलिसी प्राइवेट सेक्टर के माध्यम से वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने वाली थी। लेकिन CoWin डेटा से पता चलता है कि इसने वास्तव में वैक्सीन डोज देने वाले प्राइवेट सेक्टर की संख्या कम हो गई है। सरकार ने अस्पतालों को वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से सीधे डील करने की अनुमति दे दी है। ऐसे में कई अस्पतालों के पास वैक्सीन खरीद, ट्रांसपोर्ट व अन्य लॉजिस्टिक की सुविधा नहीं है। इसका असर वैक्सीनेशन पर पड़ रहा है।

कोरोना वैक्‍सीन की हर चौथी डोज प्राइवेट अस्‍पतालों को, पर लगाने में साबित हो रहे फिसड्डी
वैक्सीनेशन सेंटर की संख्या में कमी
इस साल अप्रैल के अंत तक, हर दिन लगभग 5,000 प्राइवेट सेंटर्स पर वैक्सीन लगाई जा रही थी। लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 1300 से 1700 तक हो गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया के इनसाइट ग्रुप के एक विश्लेषण के अनुसार, शुक्रवार को 1,689 प्राइवेट वैक्सीनेशन सेंटर पर वैक्सीन लगाई जा रही थी।

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वैक्सीन की कमी से बंद करने पड़े सेंटर
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में अपने हलफनामे में “उदारीकृत” वैक्सीन नीति को सही ठहराते था। इसके पीछे दलील दी गई थी कि प्राइवेट सेक्टर के लिए 25% वैक्सीन को अलग रखने से बेहतर पहुंच की सुविधा होगी। जो लोग पैसे दे सकते हैं वो जल्दी से प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीन लगा सकेंगे। स्थिति यह है कि वैक्सीन डोज उपलब्ध नहीं होने की वजह से देश के आठ सबसे बड़े शहरों में भी, सैकड़ों निजी अस्पतालों, विशेष रूप से छोटे और मध्यम अस्पतालों को वैक्सीनेशन बंद या काफी धीमा करना पड़ा है। वे वैक्सीन उत्पादन करने वाली कंपनियों से सीधे डील करने और ऑर्डर देने में सक्षम होने के लिए बहुत छोटे हैं।

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16 मई से नहीं लगाई कोई वैक्सीन की डोज
30 मई तक आठ सबसे बड़े शहरों में प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन की दी गई डोज की संख्या की तुलना से पता चलता है कि तीन-चौथाई से अधिक प्राइवेट वैक्सीन सेंटर्स ने 16 मई से कुछ या कोई खुराक नहीं दी थी। केवल 10% प्राइवेट सेंटर्स ने इस दो सप्ताह की अवधि में 500 से अधिक वैक्सीन की डोज लगाई। इनमें से अधिकांश बड़े अस्पताल, कॉर्पोरेट श्रृंखला अस्पतालों द्वारा स्थापित केंद्र और निजी कंपनियों द्वारा कार्यस्थलों में स्थापित किए गए केंद्र थे।

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सरकार वैक्सीनेशन कार्यक्रम पर दे ध्यान
प्राइवेट अस्पतालों का कहना है कि सरकार को वैक्सीनेशन कार्यक्रम के तहत विशेष ध्यान देना चाहिए। कई बड़े प्राइवेट अस्पतालों का कहना है कि हमने 76 लाख रुपये खर्च किये और हमें 12000 डोज मिली है। वहीं, कई अस्पतालों ने पैसा दे दिया लेकिन अबतक उनके अस्पताल में वैक्सीन की डोज नहीं मिली है ज्यादातर लोग इंतजार कर रहे हैं।

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अब तक 22.75 करोड़ लोगों को लगी वैक्सीन
देश में कोविड-19 रोधी टीकों की अब तक 22.75 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं, जिनमें से 33,57,713 खुराक शुक्रवार को दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि 18-44 आयु समूह के 16,23,602 लोगों को शुक्रवार को टीके की पहली खुराक दी गई जबकि इसी समूह के 31,217 लोगों को दूसरी खुराक दी गई।

18+ के 10 लाख लोगों को वैक्सीन की पहली डोज
अब तक 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 18-44 साल समूह के कुल 2,58,45,901 लोगों ने टीके की पहली खुराक ली है, जबकि 1,18,299 लोगों को टीके की दूसरी खुराक मिली है। इस समूह के लिए टीकाकरण अभियान की शुरुआत एक मई से हुई थी। मंत्रालय ने बताया कि बिहार, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 18-44 आयु वर्ग के 10 लाख से ज्यादा लोगों को टीके की पहली खुराक दी गई है।

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