Jail Gang War in UP: मुन्ना बजरंगी से मुकीम काला तक… बार-बार यूपी की जेल में गैंगवॉर, कैसे मिलता है हथियार? क्या बोले पूर्व डीजीपी – Navbharat Times

हाइलाइट्स:

  • चित्रकूट की मॉडर्न जेल में शुक्रवार को हुए गैंगवॉर के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं
  • मुन्ना बजरंगी से लेकर मुकीम काला तक जेल के अंदर ही अपराधियों की हत्या हो रही है, यूपी में नया पैटर्न
  • यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह और आनंद लाल बनर्जी का कहना है कि इन मामलों मे न्यायिक जांच होनी चाहिए

चित्रकूट
चित्रकूट की मॉडर्न जेल में शुक्रवार को हुए गैंगवॉर के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। मुन्ना बजरंगी से लेकर मुकीम काला तक यूपी में नया पैटर्न देखने को मिल रहा है कि जेल के अंदर ही अपराधियों की हत्या हो रही है। सवाल है कि सीसीटीवी की निगरानी में बंद कैदी के पास आखिर 9 एमएम की पिस्टल कहां से आई? वह दो अपराधियों की हत्या करने और दूसरे कैदियों को बंधक बनाने में कैसे कामयाब हुआ?

यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह और आनंद लाल बनर्जी का कहना है कि इन मामलों से जेल स्टाफ की संलिप्तता पता चलती है और उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाना चाहिए। दोनों रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच की बात की कही।

तमाम सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल के अंदर पिस्टल कैसे
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा, ‘इस प्रकरण में अंशुल दीक्षित की बात हो रही है जो सुल्तानपुर जेल से सितंबर 2019 में चित्रकूट जेल आया था। माना कि मेराज और मुकीम काला शातिर अफराधी थे लेकिन जेल में जो अपराधी रखे जाते हैं वो जूडिशल कस्टडी में होते हैं और जेल और पुलिस की अमानत होते हैं। हाई सिक्योरिटी जेल में जहां वॉच टॉवर, सीसीटीवी, तमाम सुरक्षा व्यवस्था के बीच 9 एमएम पिस्टल का अंदर जाना और इस प्रकार का शूटआउट होना, तीन बातें इंगित करता है।’

‘सजा का फैसला न्यायालय करती है न जेल न पुलिस’
न्यायिक जांच की मांग करते हुए पूर्व डीजीपी ने आगे बताया, ‘पहला किसी तरह का कोई नियंत्रण प्रशासनिक व्यवस्था नहीं थी। दूसरा भ्रष्टाचार का बोलबाला था कि अंशुल दीक्षित अपनी पिस्टल पाने में कामयाब रहा। नंबर तीन वह दो को मारने में सफल रहा- मेराज और मुकीम काला। वह ठीक है कि मुकीम काला एक लाख का इनामिया था और 60 अपराध थे लेकिन सजा का फैसला न्यायालय करती है न जेल न पुलिस।’

पूर्व डीजीपी ने की जूडिशल जांच की मांग
रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘ये पैटर्न नहीं होना चाहिए और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के जो दिशानिर्देश हैं कि इसमें मैजिस्ट्रेट जांच, सीबी सीआईडी यूपी के द्वारा जांच होनी चाहिए। तमाम परिस्थियों को देखते हुए क्योंकि अब ये शक ज्यादा गहरा हो रहा है इसलिए मैं जूडिशल जांच की संस्तुति करूंगा।’ पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा, ‘मैं इसे जेल की नालायकी नहीं कहूंगा, जेल की संलिप्तता कहूंगा। जेल स्टाफ की संलिप्तता भयावह स्थिति है क्योंकि जेलें सुरक्षित नहीं है।’

‘तीनों की बीच क्या बात हुई, इसका खुलासा होना चाहिए’

यूपी के पूर्व डीजीपी आनंद लाल बनर्जी चित्रकूट की घटना को गैंगवॉर मानने से इनकार करते हैं। उन्होंने कहा, ‘गैंगवॉर कहना अजीब है। दो मृतक पूर्व के हैं और एक पश्चिम का। हमें नहीं लगता कि तीनों में कोई लेना देना था। ये जरूर अंदरूनी लड़ाई रही होगी जिसके चलते ऐसा हुआ है। गैंगवार कहना कितना उचित है यह इनकी आपसी बातचीत और तालमेल पर निर्भर करता है इसका खुलासा होना चाहिए। जेल में इस तरह की चीजें जा रही हैं, यह हमारे इंटेलिजेंस का फेलियर है।’

‘बागपत वाली गलती चित्रकूट में भी दोहराई गई’
पूर्व डीजीपी ने कहा, ‘चित्रकूट की जेल मॉडर्न जेल है जो पिछले 15 सालों में बनी हैं, सारी सुविधाएं हैं। इसके बावजूद भी अगर उसमें असलहा लेकर लोग मारपीट करते हैं तो ये अचरज की बात है। असलहा बिना जेलर या जेल सुपरिंटेंडेंट की इच्छा के जेल के अंदर जा ही नहीं सकता। जो बागपत में गलती हुई है वह संभवत: यहां भी हुई है। बागपत कांड में जेलर या जेल सुपिरिंटेडेंट के विरुद्ध मुकदमा दायर होना चाहिए था दफा 120 बी का। उनकी भी उतनी ही गलती है जितना मारने वाली की।’

‘जेलर और जेल सुपिरिंटेंडेंट के विरुद्ध मुकदमा होना चाहिए’
रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘चित्रकूट में भी आप देखें कि सस्पेंशन हुआ है लेकिन कोई मुकदमा कायम नहीं हुआ जेलर और सुपरिंटेंडेंट के विरुद्ध। इसके अलावा बागपत में जो घटना हुई थी उसके बाद जो कदम बताए गए थे क्या वे पूरे यूपी की जेलों में लागू किए गए हैं। जिन सुधारों की बात हुई थी वो भी पब्लिक डोमेन में नहीं है। इसलिए हमें देखना पड़ेगा कि हम क्या सुधार कर सकते हैं कि जो कानून पहले थे क्या उनमें बदलाव की आवश्यकता है और इन्हें रोकने के लिए क्या कर सकते हैं?’

उन्होंने कहा, ‘जेल के अंदर कोई भी मौत हो उसकी जांच सीआईडी द्वारा किए जाने के आदेश हैं। चित्रकूट की घटना इसको बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। इसमें जो लिप्त हैं उन्हें जेल भेजा चाहिए। जड़ तक जाना जरूरी है कि जो मृतक हैं उनके क्या बातचीत हुई और उनके किससे संबंध थे।’

चित्रकूट जेल में शुक्रवार को क्या हुआ?
चित्रकूट की जिला जेल के अंदर शुक्रवार को गैंगवॉर हुआ, जिसमें दो गैंगस्टर के बीच जमकर गोलियां चलीं। इस दौरान शार्प शूटर अंशुलल दीक्षित ने मुकीम काला और मेराज अली की गोली मारकर हत्या कर दी। वहीं गोली मारने वाला गैंगस्टर अंशुल दीक्षित भी पुलिस कार्रवाई में मारा गया। देर शाम को घटना में लापरवाही सामने आने पर चित्रकूट जेल के अधीक्षक एसपी त्रिपाठी व जेलर महेंद्र पाल समेत पांच कर्मियों को निलंबित कर दिया गया।



मुन्ना बजरंगी-मुकीम काला (फाइल फोटो)

Related posts