बाहुबलियों के दौर को भूलिए! राजनीति में ब्राह्मणों और भूमिहारों का साफ-सुथरा चेहरा बनेंगे गुप्तेश्वर पांडेय? – Navbharat Times

पटना
बिहार विधानसभा से ठीक पहले राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) गुप्तेश्वर पांडेय ने अचानक स्वैच्छिक सेवानिवृति (VRS) ले ली है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी पांडेय आसन्न बिहार विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि आज शाम छह बजे वह सोशल मीडिया पर देशवासियों से मुखातिब होंगे। इसी दौरान वह अपनी आगे की रणनीति के बारे में खुलासा कर सकते हैं।

गुप्तेश्वर पांडेय के राजनीति में आने की अटकलों के बीच सत्ता के गलियारों से लेकर चौक-चौराहों पर उनके राजनीतिक भविष्य का भी अनुमान लगाया जाना शुरू हो गया है। बिहार की राजनीति में जैसे ही कोई अपना भाग्य आजमाने उतरता है तो सबसे पहले जनता उसकी जाति जानना चाहती है।

भूमिहार जाति से आते हैं गुप्तेश्वर पांडेय
गुप्तेश्वर पांडेय के नाम लगे सरनेम को देखकर कुछ लोग गच्चा खा सकते हैं कि वह ब्राह्मण हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। वह भूमिहार समाज से आते हैं। यह वही जाति है जिनके खिलाफ आवाज बुलंद कर लालू प्रसाद यादव लंबे समय तक सत्ता में बने रहे। 1980 से 1990 के दौर तक बिहार में चले जाति संघर्ष के केंद्र बिंदु में भी भूमिहार जाति ही रही। राज्य के ज्यादातर भूमिहार जमीन-जायदाद भरपूर रहे, जिसके चलते उनका भूमिहीनों खासकर दलितों के खिलाफ लंबा संघर्ष चला। नक्सली और भूमिहीनों से जंग के लिए राज्य में ब्रह्ममेश्वर मुखिया नामक शख्स ने रणवीर सेना बनाई। यह समाज के लोगों के द्वारा बनाई गई सेना थी। इसके ज्यादातर सदस्य भूमिहार जाति से आते थे।

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श्रीकृष्ण सिंह के बाद भूमिहार जाति से नहीं आया कोई जनप्रिय नेता
भूमिहार जाति ने राज्य की राजनीति को श्रीकृष्ण सिंह जैसा कद्दावर नेता दिया, जो बिहार के पहले मुख्यमंत्री भी बने। लेकिन पिछले तीन दशक के दौर पर नजर डालें तो राज्य में भूमिहार जाति से कोई भी जनप्रिय नेता पैदा नहीं हो पाए। मौजूदा वक्त की ही बात करें तो भूमिहार नेता के नाम पर राज्य में सूरजभान सिंह, अनंत सिंह, अखिलेश प्रसाद सिंह जैसे नाम लिए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि राज्य में भूमिहार जाति के विधायक सांसद नहीं हैं, लेकिन उनमें से कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो जिसे मौजूदा वक्त में राज्य स्तर का नेता माना जाए। ऐसे में चर्चा शुरू हो गई है कि बाहुबलियों के दौर में क्या गुप्तेश्वर पांडेय भूमिहार समाज का साफ-सुथरा चेहरा बन पाएंगे। क्योंकि गुप्तेश्वर पांडेय पूरी नौकरी के दौरान बिहार के बाहुबलियों और अपराधियों के जानी दुश्मन बने रहे।

11 साल पहले भी VRS ले चुके थे गुप्तेश्वर पांडे

खास बात यह है कि गुप्तेश्वर पांडेय का बतौर एसपी कार्यकाल भूमिहार बाहुल्य बेगुसराय और जहानाबाद में चर्चित रहा। बेगुसराय में गुप्तेश्वर पांडेय के एसपी रहते हुए करीब 42 एनकाउंटर हुए, जिसमें से ज्यादातर अपराधी इसी जाति विशेष से आते थे। इसी तरह जहानाबाद में भी भूमिहार समाज पर नरसंहार के आरोप लगे तो गुप्तेश्वर पांडेय ने कार्रवाई करने में तनिक भी झिझकता नहीं दिखाई। इस वजह से वह काफी चर्चा में रहे थे।

जातीय समीकरण को कैसे साधेंगे गुप्तेश्वर पांडेय?
बिहार में भूमिहार जाति के करीब 4.7% वोटर हैं। लेकिन यह वोटर राजनीतिक रूप से जागरूक है। देखना दिलचस्प होगा कि गुप्तेश्वर पांडेय इस वोट बैंक को कैसे अपने साथ जोड़ते हैं। इसके अलावा उम्मीद की जा रही है कि गुप्तेश्वर पांडेय 5.7% ब्राह्मण और 5.2% राजपूत वोटरों में से भी कुछ को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि आखिरी फैसला जनता को ही करना है। यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चल पाएगा कि जनता गुप्तेश्वर पांडेय को किस रूप में लेती है।

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