बड़ी खबर : किसान बिल पर विपक्ष के आरोपों की काट! आज ही हो सकता है MSP बढ़ाने का फैसला – News18 हिंदी

विपक्ष के आरोपों के बीच कैबिनेट की बैठक में MSP बढ़ाने पर आज बड़ा फैसला हो सकता है. (फाइल)

दोनों सदनों में किसान बिल पास होने के बाद भी इसे लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी है. इस बीच आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है. CACP की सिफारिश पर कैबिनेट यह फैसला ले सकता है.

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  • Last Updated:
    September 21, 2020, 3:42 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार किसान बिल पर विवाद के बीच आज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने का फैसला ले सकती है. आज 2020-21 के रबी सीज़न के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को कैबिनेट से मंजूरी मिल सकती है. आज दोपहर 1:30 बजे कैबिनेट की बैठक (Cabinet Meeting) होने वाली है. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गेहूं की MSP में 85 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करने की सिफारिश है.

CACP ने की है MSP बढ़ाने की सिफारिश
रबी फसलों पर MSP बढ़ाने की सिफारिश कृष‍ि लागत और मूल्य आयोग (CACP-Commission for Agricultural Costs and Prices) ने की है. ऐसे में आज होने वाली बैठक में कैबिनेट CACP की सिफारिश के आधार पर फैसला ले सकती है. वित्त वर्ष 2019-20 के लिए गेहूं का न्यूनतम ​समर्थन मूल्य 1,840 रुपये प्रति क्विंटल था. अब CACP ने इसे बढ़ाकर 1,925 रुपये प्रति क्विंटल करने की सिफारिश की है.

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इसके अलावा जौ की MSP 1,400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 1,525 रुपये प्रति क्विंटल करने की सिफारिश की गई है. चने की MSP 255 रुपये से बढ़ाकर 4875 रुपये प्रति क्विंटल करने की सिफ़ारिश की है. दालों की MSP में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है. दालों की MSP में 7.3% बढोतरी की जा सकती है.

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फिलहाल केंद्र सरकार द्वारा 2018 में लिए गए एक फैसले के बाद किसानों को उनके उत्पादन खर्च का 1.5 गुना MSP मिलना सुनिश्चित हुआ है. MSP लागू करने से किसानों को सामान्य समय में या जब बाजार में बहुत उतार-चढ़ाव देखने को मिले, तब उन्हें उनकी फसल की सही कीमत सुनिश्चित होती है.

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समर्थन मूल्य क्यों?
केंद्र सरकार कृष‍ि लागत और मूल्य आयोग (CACP-Commission for Agricultural Costs and Prices) की सिफारिश पर कुछ फसलों के बुवाई सत्र से पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है. इससे किसानों को यह सुनिश्चित किया जाता है कि बाजार में उनकी फसल की कीमतें गिरने के बावजूद सरकार उन्हें तय मूल्य देगी. इसके जरिए सरकार उनका नुकसान कम करने की कोश‍िश करती है.

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