झारखंड/ धर्मप्रचार के लिए 14 दिन से हिंदपीढ़ी में रुकी मलेशियाई युवती कोरोना संक्रमित, राज्य में मिला पहला कोरोना पॉजिटिव – Dainik Bhaskar

पूरे हिंदपीढ़ी इलाके में कर्फ्यू… 3 किमी. के दायरे में हर व्यक्ति की स्क्रीनिंग होगी  16 को राजधानी एक्स. के बी-1 कोच में दिल्ली से आई थी युवती, सभी यात्रियों की होगी जांच

दैनिक भास्कर

Apr 01, 2020, 08:31 AM IST

रांची. देश में 30 जनवरी को कोरोना वायरस संक्रमण का पहला केस मिलने के 60 दिन बाद मंगलवार को झारखंड में भी पहला कोरोना पॉजिटिव मरीज मिला है। राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी इलाके की दो मस्जिदों से पकड़े गए 17 विदेशी नागरिकों समेत 22 लोगों में शामिल एक मुस्लिम युवती में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। 19 वर्षीय ये युवती मलेशिया की नागरिक है। इस युवती समेत ये सभी 22 लोग तब्लीगी जमात से जुड़े हुए हैं। सोमवार को इन लोगों को खेलगांव स्थित क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया था और सभी के कोरोना टेस्ट किए गए थे। इस युवती के अलावा बाकी 21 लोगों का टेस्ट नेगेटिव आया था, मगर अब इन सभी 21 लोगों की दोबारा जांच की जाएगी। 

मंगलवार देर शाम युवती को रिम्स के ट्रॉमा सेंटर स्थित आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया। युवती पिछले 14 दिनों से हिंदपीढ़ी इलाके में रह रही थी। इसे देखते हुए पूरे हिंदपीढ़ी क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया है। वहां से तीन किलोमीटर के एरिया में हर व्यक्ति की स्क्रीनिंग की जाएगी। जिसमें घर घर जाकर लक्षणों की पड़ताल होगी। सिविल सर्जन डॉ विजय बिहारी प्रसाद ने बताया कि मंगलवार रात से स्क्रीनिंग शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि जिस घर से महिला मिली है वहां से तीन किलोमीटर के दायरे को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है। जबकि सात किलोमीटर के दायरे को बफर जोन बनाया गया है। कंटेनमेंट एरिया को पूरी तरह सील कर दिया जाएगा। वहां के हर वयक्ति को 28 दिन के क्वारेंटाइन में रखा जाएगा। बफर जोन में किसी भी बाहरी व्यक्ति का आना जाना प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही जहां से भी वह महिला गुजरी है उसके 7 किमी एरिया को सेनेटाईज किया जाएगा। ये युवती 16 मार्च को राजधानी एक्सप्रेस के बी-1 कोच में दिल्ली से रांची आई थी। प्रशासन उसके साथ यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को ट्रेस कर रहा है।

पॉजिटिव केस के साथ दिखीं रिम्स की कमियां
रिम्स में कोरोना पॉजिटिव केस आने के बाद जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने सुपरिटेंडेंट डॉ. विवेक कश्यप से मिल कहा कि वे बगैर सुरक्षा उपकरणों के कैसे काम करेंगे। सुपरिटेंडेंट ने जूनियर डॉक्टरों से कहा कि मरीज के पास जिस डॉक्टर की ड्यूटी लगाई जाएगी उसे 14 दिनों के लिए क्वारेंटाइन के लिए किसी होटल में रखा जाएगा। इस पर जूनियर डॉक्टर्स ने कहा कि जब तक पीपीई नहीं आता, तब तक वे ड्यूटी नहीं करेंगे। रिम्स के निदेशक डॉ डीके सिंह ने भी स्वीकार किया कि पीपीई की बहुत कमी है।

रात 10 बजे व्हाट्सएप पर रिपोर्ट देखने के बाद रिम्स जाने को तैयार हुई पीड़िता
पॉजिटिव महिला 3 घंटे तक मेडिकल टीम, मजिस्ट्रेट और पुलिस के सामने ड्रामा करती रही। वह रिम्स जाने को तैयार नहीं थी। वह अपने पति और अन्य लोगों के साथ क्वारेंटाइन होम में रहने पर अड़ी थी। यह भी मानने को तैयार नहीं थी कि उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव है। अंत में खेलगांव थाना प्रभारी के मोबाइल पर व्हाट्सएप पर रिपोर्ट मंगवाई गई। रिपोर्ट देखने के बाद वह तैयार हुई। रात 10:15 में महिला को एंबुलेंस से रिम्स ले जाया गया। एम्बुलेंस में साथ गय उसका पति रिम्स में रुकना चाहता था, मगर उसे क्वारेंटाइन होम वापस भेजा गया।

फूट-फूट कर रोने लगी नर्स 

रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर खेलगांव क्वारेंटाइन होम में ड्यूटी करने वाली नर्स रोने लगी। उसका कहना था कि वह बगैर पीपीई के ड्यूटी कर रही है।

कोई ड्राइवर नहीं था तैयार: रिम्स का कोई भी ड्राइवर संक्रमण के डर से खेलगांव नहीं जाना चाहता था। अंतत: जयप्रकाश नाम का ड्राइवर तैयार हुआ। उसे पीपीई किट पहनाकर भेजा गया।

लक्षण नहीं, मगर रिपोर्ट पॉजिटिव यानी ज्यादा खतरनाक
जिस महिला में कोरोना की पुष्टि हुई है, उसमें लक्षण नहीं पाए गए थे। रिम्स अधीक्षक डॉ. विवेक कश्यप ने बताया कि इसे एसिम्प्टोमैटिक कहा जाता है। एेसे मरीज अौर संक्रमण फैलाने में सहायक होते हैं। कारण है कि उनमें लक्षण नहीं होता है। ऐसे में वह आईसोलेशन में नहीं जाते हैं और संक्रमण कम्युनिटी में फैला सकते हैं।

सोमवार रात मिले थे पॉजिटिव के संकेत…नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से करवाई गई पुष्टि
हिंदपीढ़ी इलाके से पकड़े गए 22 लोगों समेत 41 संदिग्धों की जांच रिम्स में सोमवार को की जा रही थी। इसमें से 40 की जांच रिपोर्ट रात एक बजे अा गई थी। इस मलेशियाई महिला की रिपोर्ट पर डॉक्टरों को शक हुआ। चूंकि यह झारखंड का पहला केस था इसलिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) पुणे से क्लीयरेंस लेना था। महिला की जांच का ग्राफ पुणे भेजा गया। वहां से कंफर्म हुआ तो सुबह तीन बजे महिला के पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज ने बताया कि दिन में जांच के दौरान उन्हें शक हुआ था।

कोरोना संदिग्ध मरीज की मौत के बाद 2 डाॅक्टर, 9 पारा मेडिकल स्टाफ आइसोलेशन वार्ड में एडमिट
एमजीएम अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में मंगलवार को कोरोना के एक संदिग्ध मरीज की मौत हाे गई। इसके बाद उक्त मरीज का इलाज करने वाले दो डाॅक्टर अाैर नौ पारा मेडिकल स्टाफ को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में एडमिट कर दिया गया है। उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। सोनारी पंचवटी नगर निवासी 40 वर्षीय वीरेंद्र प्रसाद की सोमवार रात अचानक तबीयत खराब हाे गई। परिजन मंगलवार की सुबह करीब पांच बजे उन्हें लेकर एमजीएम के इमरजेंसी में पहुंचे। डाॅक्टरों ने जांच में पाया कि पल्स रेट भी नहीं मिल रहा था और शुगर लेवल मात्र 23 था। डाॅक्टर पहले मल्टीआर्गेन फेल्योर समझकर उसकी इलाज कर रहे थे, लेकिन बुखार, गले के इंफेक्शन व सांस लेने में परेशानी की शिकायत पर उन्हें कोरोना का शक हुआ और आइसोलेशन में वार्ड में शिफ्ट कर दिया। इस बीच मरीज की मौत हो गई। इसके बाद मरीज का इलाज करने वाले एक सीनियर और एक जूनियर डाॅक्टर और नौ पारा मेडिकल स्टाफ को आइसोलेशन वार्ड में एडमिट किया गया। वहीं उनका ब्लड सैंपल वायराेलाॅजी लैब भेजा गया। 

गुमला में दिल्ली से लौटे बुखार पीड़ित की मौत, मृत युवक व दो परिजनों का सैंपल रिम्स भेजा
गुमला|रायडीह प्रखंड के एक युवक का मंगलवार को इलाज के लिए रायडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाने के दौरान मौत हो गई। युवक को पेट मे तेज दर्द व लूज मोशन व बुखार की शिकायत के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया जा रहा था। बताया गया कि वह 18 मार्च को ही दिल्ली से वापस लौटा था। मृत युवक और उसके दो परिजनों के सैंपल रिम्स भेजे गए हैं।

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