इन 10 तरीकों से लोगों के बैंक खाते में हो रही हैं पैसों की चोरी, ऐसे बचें

नई दिल्ली. आपने अपने आस-पास कई लोगों को यह कहते सुना होगा कि उनके कार्ड (Credit-Debit Card) से किसी ने पैसे निकाल लिए जबकि एटीएम कार्ड (ATM Card) उनकी जेब में ही था. ऐसा ही एक वाकया दिल्ली में काम कर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अमित चौहान के साथ भी हुआ. अमित रोज की तरह ऑफिस में काम कर रहे थे तभी उनके पास मैसेज आया कि उनके खाते से 10 हजार रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है. जब उन्होंने इसकी जांच की तो पता चला कि उनके साथ एटीएम फ्रॉड किया गया है.अमित चौहान ने News18 Hindi को बताया है कि बुधवार को जब वह ऑफिस में काम रहे थे तभी उनके फोन पर मैसेज आया कि दिल्ली के पांडव नगर इलाके में स्थित एटीएम से किसी ने उनके खाते से 10 हजार रुपये निकाल लिए हैं. फिलहाल उन्होंने पुलिस और बैंक को इसकी जानकारी दे दी है और इसकी जांच की जा रही है.अब सवाल उठता है कि आखिर, इस तरह की धोखाधड़ी आखिर होती कैसे हैं. इस पर साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट बताते हैं कि मौजूदा समय में फ्राड करने वाले बैंक खातों से पैसे चुराने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. इसमें एटीएम क्लोनिंग, व्हाट्सऐप कॉल के जरिए फर्जीवाड़ा, कार्ड के डाटा की चोरी, यूपीआई के जरिए चोरी, लॉटरी के नाम पर ठगी, बैंक खातों की जांच के नाम पर ठगी प्रमुख है.आपको ये जानकार हैरानी होगी कि पिछले 11 साल में 53,334 लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई है. इसमें 2.05 लाख करोड़ रुपये की चपत आम ग्राहकों को लगी. आरबीआई की ताजा रिपोर्ट बताती है कि डिजिटल लेनदेन के चलते साल 2018-19 में 71,500 करोड़ रुपये का बैंकिंग फ्रॉड हुआ है.इस अवधि में बैंक फ्रॉड के 6800 से अधिक मामले सामने आए है. साल 2017-18 में बैंक फ्रॉड के 5916 मामले सामने आए थे. इनमें 41,167 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी हुई थी. पिछले 11 वित्त वर्ष में बैंक फ्रॉड के कुल 53,334 मामले सामने आए हैं, जबकि इनके जरिये 2.05 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है.इन 10 तरीकों से आम लोगों के पैसों की होती हैं खाते से चोरी(1) कार्ड के डाटा की चोरी- एटीएम कार्ड के डाटा की चोरी के लिए जालसाज कार्ड स्कीमर का इस्तेमाल करते हैं. इसके जरिए जालसाज कार्ड रीडर स्लॉट में डाटा चोरी करने की डिवाइस लगा देते हैं और डाटा चुरा लेते हैं. इसके अलावा फर्जी की बोर्ड के जरिए भी डाटा चुराया जाता है. किसी दुकान या पेट्रोल पंप पर अगर आप अपना क्रेडिट कार्ड स्वाइप कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि कर्मचारी कार्ड को आपकी नजरों से दूर ना ले जा रहा हो.(2) एटीएम कार्ड की क्लोनिंग- साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट बताते हैं कि पहले सामान्य कॉल के जरिए ठगी होती थी लेकिन अब डाटा चोरी कर पैसे खाते से निकाले जा रहे हैं. ठग हाईटेक होते हुए कार्ड क्लोनिंग करने लगे हैं. एटीएम कार्ड लोगों की जेब में ही रहता है और ठग पैसे निकाल लेते हैं. एटीएम क्लोनिंग के जरिए आपके कार्ड की पूरी जानकारी चुरा ली जाती है और उसका डुप्लीकेट कार्ड बना लिया जाता है. इसलिए एटीएम इस्तेमाल करते वक्त पिन को दूसरे हाथ से छिपाकर डालें.[embedded content](3) बैंक खातों की जांच के नाम पर ठगी- साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बैंक खातों की जांच आपको समय-समय पर करनी चाहिए और अस्वीकृत लेनदेन के बारे में तुरंत अपने बैंक को जानकारी देनी चाहिए.(4) नौकरी के नाम पर ऑनलाइन फ्रॉड-कई जॉब पोर्टल संक्षिप्त विवरण को लिखने, विज्ञापित करने और जॉब अलर्ट के लिए फीस लेते हैं, ऐसे पोर्टलों को भुगतान करने से पहले, वेबसाइट की प्रमाणिकता और समीक्षाओं की जांच करना जरूरी है.(5) शादी की वेबसाइट पर लोगों के साथ ठगी- अगर आप ऑनलाइन मैट्रिमोनियल साइट पर पार्टनर की तलाश कर रहे हैं तो जरा सावधान रहिए क्योंकि इसके जरिए भी ठगी हो रही है. चैटिंग के जरिए फ्राड करने वाले आपके बैंक खाते से जुड़ी जानकारियां मांगते हैं. ऐसे में बैंक खाते से रकम उड़ा ली जाती है. गृह मंत्रालय के साइबर सुरक्षा विभाग के मुताबिक ऑनलाइन वैवाहिक साइट पर चैट करते वक्त निजी जानकारी साझा ना करें और साइट के लिए अलग से ई-मेल आईडी बनाएं और बिना किसी पुख्ता जांच किए निजी जानकारी साझा करने से बचें.(6) व्हाट्सऐप कॉल के जरिए फर्जीवाड़ा- अगर व्हाट्सऐप पर किसी अनजान नंबर से वॉइस कॉल आती है तो आप सावधान हो जाइए क्योंकि फोन करने वाला आपको ठग सकता है. इस वारदात को अंजाम देने के बाद आपके नंबर को ब्लॉक कर सकता है. वॉइस कॉल करने वाला अपनी ट्रिक में फंसाकर आपके पैसे हड़प सकता है.(7) यूपीआई के जरिए ठगी- यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस के जरिए किसी को भी आसानी से पैसे भेजे या मंगाए जा सकते हैं. यूपीआई के जरिए ठग किसी व्यक्ति को डेबिट लिंक भेज देता है और जैसे ही वह उस लिंक पर क्लिक कर अपना पिन डालता है तो उसके खाते से पैसे कट जाते हैं. इससे बचने के लिए अनजान डेबिट रिक्वेस्ट को तुरंत डिलीट कर देना चाहिए. अजनबियों के लिंक भेजने पर क्लिक ना करें.(8) क्यूआर कोड से धोखाधड़ी- क्यूआर यानी क्विक रिस्पांस कोड के जरिए जालसाज ग्राहकों को भी लूटने का काम कर रहे हैं. इसके जरिए मोबाइल पर क्यूआर कोड भेजा जाता है और उसे पाने वाला शख्स क्यूआर कोड लिंक को क्लिक करता है तो ठग उसके मोबाइल फोन का क्यूआर कोड स्कैन कर बैंक खाते से रकम निकाल लेते हैं.(9) लॉटरी, पेट्रोल पंप डीलरशिप के नाम पर ऑनलाइन ठगी- साइबर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बीते दिनों टीवी प्रोग्राम कौन बनेगा करोड़पति के नाम पर लाखों रुपये की लॉटरी निकालने का झांसा देकर कई लोगों के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है. वहीं, पिछले साल, देश की सबसे बड़ी ऑयल मार्केंटिंग कंपनी IOC ने अपनी वेबसाइट पर पेट्रोलपंप की डीलरशिप के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़ी जानकारी दी थी.(10) ई-मेल स्पूफिंग-ई-मेल स्पूफिंग के जरिए ठग ऐसी ई-मेल आईडी बना लेते हैं जो नामी गिरामी कंपनियों से मिलती-जुलती होती हैं और फिर सर्वे फॉर्म के जरिए लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर डाटा चुरा लेते हैं. गूगल सर्च के जरिए भी ठगी के मामले सामने आए हैं. जालसाज सर्च इंजन में जाकर मिलती जुलती वेबसाइट बनाकर अपना नंबर डाल देते हैं और अगर कोई सर्च इंजन पर कोई खास चीज तलाशता है तो वह फर्जी साइट भी आ जाती है.(11) रिवॉर्ड पाइंट के नाम पर ठगी- देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI ने हाल में अपने ग्राहकों को अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि रिवॉर्ड पाइंट के नाम पर फ्रॉड करने वाले SMS भेजते हैं. उन SMS में बैंक खाते से जुड़ी जानकारियां मांगी जाती है और जैसे ही जानकारी उनके पास पहुंचती है. वैसे ही खाते से पैसे उड़ा लिए जाते हैं. इसीलिए बैंक लगातार अपने ग्राहकों को सावधान करते रहते हैं.जानिए बैंकिंग फ्रॉड से बचने के लिए बेहतरीन टिप्स, कभी नहीं डूबेगा आपका पैसा टिप्स-1  लिखें नहीं याद रखें पासवर्ड- आपको नेट बैंकिंग पासवर्ड याद कर लेना चाहिए. इसे किसी को भी न बताएं. न ही इसे कहीं लिखकर रखें. नेट बैंकिंग का इस्तेमाल हमेशा अपने कंप्‍यूटर पर सिक्योर नेटवर्क से करना चाहिए.टिप्स-2 पेमेंट से पहले चेक करें वेबसाइट कितनी सेफ- ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय साइट के सुरक्षित होने का संकेत भी देख लें, जैसे- ब्राउजर स्टेटस बार पर लॉक आइकॉन या ‘https’ यूआरएल, जहां ‘एस’ उसके सुरक्षित होने की पहचान है. पब्लिक कंप्यूटर या असुरक्षित नेटवर्क से इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करना समझदारी नहीं है. कंप्यूटर की बोर्ड की जगह डिजिटल की बोर्ड का उपयोग करना बेहतर है. इस्तेमाल करने के बाद वेबसाइट से लॉग-आउट करना नहीं भूलें.टिप्स-3 बैंक में जरूर अपडेट कराएं अपना मोबाइल नंबर- अपने बैंक या क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली संस्था को अपनी पूरी जानकारी देनी चाहिए. मतलब साफ है कि एड्रेस, मोबाइल नंबर जरूर बताना चाहिए. साथ ही, नंबर बदलने पर बैंक को इसकी जानकारी भी तुरंत दें. इससे बैंक या आपके खाते में किसी भी तरह के बदलाव की सूचना आपको आसानी से भेजी जा सकती है. हर हफ्ते कम से कम एक बार बैंक एकाउंट या क्रेडिट कार्ड एकाउंट चेक करने के साथ ट्रांजेक्शन पर नजर रखना जरूरी है. मोबाइल बैंकिंग द्वारा सक्रिय रहें और अपने ट्रांजेक्शन पर नजर रखें.टिप्स-4 इन ईमेल से रहें दूर- फिशिंग ऐसी ईमेल है जो आपको फंसाने के लिए भेजी जाती है. यह बैंक या किसी शॉपिंग वेबसाइट या बड़े कारोबारी संस्थान से भेजी हुई लगती हैं. इनके माध्यम से आपकी व्यक्तिगत जानकारी मांगने की कोशिश की जाती है. इन लिंक पर क्लिक करते ही नकली वेबसाइट खुल जाती है. जैसे ही आप अपना यूजर आइडी और पासवर्ड दर्ज करते हैं, आपका मोबाइल नंबर, लॉग-इन आइडी, पासवर्ड, डेबिट/क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी, सीवीवी, जन्म दिन आदि की चोरी की जा सकती है.टिप्स-5 बैंक कभी नहीं मांगता आपके ये जानकारियां- बैंक के पास आपकी सभी जानकारी मौजूद होती है और वह कभी ई-मेल से या फोन से आपसे CVV या OTP नहीं मांगता. इस तरह की जानकारी अगर कोई मांग रहा है तो वह खतरे का संकेत है. किसी से भी इस तरह की गोपनीय जानकारी शेयर ना करें.टिप्स-6 मोबाइल फोन में डालें एंटी वायरस- वायरस और सायबर अटैक से बचाव में एंटी वायरस बहुत काम आता है. सस्ते या फ्री एंटी-वायरस के लालच में ना आएं. इसे समय-समय पर अपडेट करते रहें. अगर आपको किसी ऐसे ट्रांजेक्शन का पता चलता है जो आपने नहीं किया है, तो तत्काल अपने बैंक से इस बारे में शिकायत दर्ज कराएं.टिप्स-7 अगर आप क्रेडिट कार्ड से पेमेंट कर रहे हैं तो ऐसे कार्ड से पेमेंट करें, जिसकी लिमिट कम हो. अगर आप डिजिटल वालेट से पेमेंट कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि उसमें भी पहले से पैसे ना पड़े हों. जब आप शॉपिंग करें, तभी पेमेंट ट्रांसफर करें.टिप्स-8 भूलकर भी न सेव करें अपनी डिटेल्स- बहुत से लोग शॉपिंग करते वक्त बार-बार कार्ड नंबर एंटर करने की परेशानी से बचने के लिए अपना कार्ड नंबर और एक्सपायरी वगैरह उस साइट पर सेव कर लेते हैं. ऐसा ना करें. अगर आप थोड़ी सी परेशानी से बचने के लिए ऐसा करते हैं तो इससे आपको बड़ी चपत लग सकती है. कार्ड की डीटेल शॉपिंग/ट्रांजेक्शन साइट पर दोबारा डालना परेशानी की वजह हो सकता है, लेकिन यह सुरक्षित भी है.’ किसी भी वेबसाइट, सर्वर, मोबाइल या डेस्कटॉप पर क्रेडिट/डेबिट कार्ड्स की डिटेल सेव न करें.टिप्स-9 चेक देते वक्त बरतें सावधानी- चेकबुक को हमेशा सुरक्षित जगह रखना चाहिए. चेकबुक में साइन किए हुए चेक नहीं रखें. न ही किसी को बिना ब्योरा भरे साइन किया हुआ चेक दें. रिकॉर्डिंग स्लिप पर जारी किए गए चेक का ब्योरा दर्ज करें.एटीएम कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग में किसी फ्रॉड के मामले में अगर तीन दिन के भीतर बैंक को शिकायत कर दी तो आपका पैसा वापस मिल जाएगा. एटीएम कार्ड से किसी फ्रॉड या गलत लेन-देन पर आपको 3 से 7 दिन का नियम जरूर याद रखना चाहिए. RBI की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि बैंक अकाउंट से कोई फ्रॉड होता है और वह समय पर बैंक को इसकी सूचना देता है तो उसका नुकसान नहीं होगा. इस मामले में बैंक उसके पैसे की भरपाई कर देगा.
Source: News18 News

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