NCR लागू होते ही घुसपैठिये होंगे देश से बाहर, शाह ने कही ये खास बातें

नई दिल्ली. लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment) Bill 2019) पास हो गया. इसके अंतर्गत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक जैसे हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोग भारत में नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र हो गए हैं.सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह ने इस बिल को लोकसभा में रखा तो कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने बिल का विरोध करते हुए हंगामा किया. AIMIM के मुखिया असद्दुदीन ओवैसी ने इस बिल को मुस्लिमों के खिलाफ बताते हुए बिल की कॉपी फाड़ दी, जिस पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. इसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के सवालों का एक-एक करके जवाब दिया. आइए बताते हैं शाह के भाषण की कुछ खास बातें…1. गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं सदन के माध्यम से पूरे देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह विधेयक कहीं से भी असंवैधानिक नहीं है. विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं करता है. अगर इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर नहीं होता तो मुझे विधेयक लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती.’2. अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते हुए देश में किसी भी धर्म के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है. यह सरकार सभी को सम्मान और सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है. जब तक मोदी प्रधानमंत्री हैं, संविधान ही सरकार का धर्म है.’3. अमित शाह ने कहा कि इस विधेयक पास होने के बाद से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोग भारतीय में नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र बन गए हैं.4. अमित शाह ने मुस्लिम देशों में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार का जिक्र करते हुए कुछ आंकड़े पेश किए. उन्होंने कहा कि 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी 23 प्रतिशत थी. जो 2011 में 3.7 प्रतिशत हो गई. बांग्लादेश में 1947 में अल्पसंख्यकों की आबादी 22 प्रतिशत थी जो 2011 में 7.8 प्रतिशत हो गई.5. अमित शाह ने कहा कि भारत में धर्म के आधार पर भेदभाव हो रहा है ऐसा कहना गलत है क्योंकि भारत में 1951 में 84 प्रतिशत हिंदू थे जो 2011 में कम होकर 79 फीसदी रह गए, वहीं मुसलमान 1951 में 9.8 प्रतिशत थे जो 2011 में बढ़कर 14.8 प्रतिशत हो गए हैं. उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर भेदभाव न हो रहा है और ना आगे होगा.Loading… 6. अमित शाह ने कहा कि देश में किसी शरणार्थी नीति की जरूरत नहीं है. भारत में शरणार्थियों के संरक्षण के लिए पर्याप्त कानून हैं. उन्होंने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने द्विराष्ट्र नीति की बात की लेकिन कांग्रेस ने उसे रोका नहीं. उसने धर्म के आधार पर देश का विभाजन स्वीकार किया था, यह ऐतिहासिक सत्य है.
7. अमित शाह ने कहा कि जब हम एनआरसी लेकर आएंगे तो देश में एक भी घुसपैठिया बच नहीं पाएगा. हमें एनआरसी की पृष्ठभूमि बनाने की जरूरत नहीं है. हमारा रुख साफ है कि इस देश में एनआरसी लागू होकर रहेगा.8. अमित शाह ने कहा कि हमें मुसलमानों से कोई नफरत नहीं है और कोई नफरत पैदा करने की कोशिश भी ना करे. देश को तोड़ने की बात करना ठीक नहीं है.9. गृह मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के दलों ने विधेयक का समर्थन किया है. सिक्किम को भी संरक्षण प्राप्त है और चिंता करने की जरूरत नहीं है.10. लोकसभा में विधेयक रखते हुए अमित शाह ने कहा कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान ऐसे राष्ट्र हैं जहां राज्य का धर्म इस्लाम है. यहां पर हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार की खबरें रोज आती हैं. यहां पर इनके अधिकार सुरक्षित नहीं हैं.11. अमित शाह ने कहा कि देश के बंटवारे के समय नेहरू-लियाकत समझौता हुआ जिसमें एक दूसरे के यहां अल्पसंख्यकों को सुरक्षा की गारंटी देने की प्रतिबद्धता थी. हमारे यहां तो अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान की गई लेकिन अन्य देशों में ऐसा नहीं हुआ.12. लोकसभा में विधेयक को रखते हुए अमित शाह ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए छह धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी जाएगी.13. अमित शाह ने पूर्वोत्तर क्षेत्र की सामाजिक एवं भाषाई विशिष्टता के संरक्षण की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि अब मणिपुर को भी इनर लाइन परमिट व्यवस्था में शामिल किया जाएगा.14. अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि ऐसे अवैध प्रवासियों को जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश कर लिया है, उन्हें अपनी नागरिकता संबंधी विषयों के लिए एक विशेष शासन व्यवस्था की जरूरत है.ये भी पढ़ें- सात घंटे की चर्चा के बाद लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास, शाह बोले- घुसपैठियों को जाना होगा
Source: News18 News

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