पूरे भारत में NRC, BJP की राजनीतिक जुमलेबाजी, कभी नहीं बनेगी वास्तविकता- ममता

ममता बनर्जी ने पूरे देश में NRC को एक राजनीतिक जुमलेबाजी बताया है (फाइल फोटो, PTI)

ममता बनर्जी (Mamata banerjee) ने कहा, ‘‘एनआरसी (NRC) एक राजनीतिक जुमलेबाजी है. यह कभी भी एक वास्तविकता नहीं हो सकती. BJP राजनीतिक जुमलेबाजी (Political Rhetoric) का इस्तेमाल करने में व्यस्त हैं लेकिन हमें उनके झांसे में नहीं फंसना चाहिए.”

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) ने एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजी- NRC) पर भाजपा (BJP) की बयानबाजी को लेकर मंगलवार को निशाना साधा और कहा कि पूरे भारत में नागरिक पंजी कभी भी एक वास्तविकता नहीं हो सकता क्योंकि देश में रहने वाले सभी लोग उसके वैध नागरिक (Legal Citizen) हैं.इस देश में रहने वाले सभी लोग उसके वैध नागरिक हैं और कोई भी उनकी नागरिकता (Citizen) नहीं छीन सकता.’’’NRC पर विरोध केवल राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय आधार पर भी’पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) ने कहा कि एनआरसी (NRC) को लेकर उनका विरोध केवल राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय आधार (Humanitarian Ground) को लेकर भी है.तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख बनर्जी ने कहा, ‘‘देश में पिछले कई दशक से रह रहे किसी व्यक्ति को आप कैसे अचानक विदेशी घोषित कर सकते हैं. यह पूरी तरह अस्वीकार्य है. अखिल भारतीय स्तर (All India Level) पर एनआरसी कभी हकीकत नहीं बनेगी.’’NRC के बाद सरकार के एजेंडे में सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिलवहीं NRC की प्रक्रिया के बाद सरकार CAB- सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल को लेकर भी काफी संजीदा है. केंद्रीय कैबिनेट (Central Cabinet) की मीटिंग बुधवार सुबह साढ़े नौ बजे संसद के एनेक्सी (Parliament Annexe) में होनी है. सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय कैबिनेट की इस बैठक में नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill- CAB) पारित हो सकता है.Loading… इस नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) के मुताबिक नागरिकता कानून, 1955 (Citizenship Act, 1955) में संशोधन किया जाना है. इस बिल का भी असम सहित भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बहुत विरोध हो रहा है.इस नागरिकता संशोधन विधेयक से पाकिस्तान (Pakistan), अफगानिस्तान (Afghanistan) और बांग्लादेश (Bangladesh) से आए गैर मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दिए जाने की बात कही गई है. इस बिल के कानून बन जाने के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को 12 साल के बजाए 6 साल गुजारने पर ही भारतीय नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा.
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First published: December 3, 2019, 8:24 PM IST

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Source: News18 News

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