Ayodhya Verdict: जानिए क्या है सुन्नी वक्फ बोर्ड, जिसे अयोध्या फैसले में मिली 5 एकड़ जमीन

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिया। वहीं अयोध्या में 5 एकड़ जमीन मस्जिद के निर्माण के लिए देने की बात कही। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से जफर फारुकी ने कहा कि बोर्ड अयोध्या विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हम पहले से कह रहे हैं कि हम देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले का स्वागत करेंगे। सुन्नी वक्फ बोर्ड क्या है वक्फ बोर्ड एक कानूनी निकाय है, जिसका गठन साल 1964 में वक्फ कानून 1954 के तहत किया था। वक्फ बोर्ड बनाने का मकसद देश में इस्लामिक इमारतों, संस्थानों और जमीनों के रखरखाव और उनके इस्तेमाल को देखना था। वक्फ बोर्ड में एक अध्यक्ष और 20 सदस्य होते हैं। इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। वर्तमान में देशभर में कुल 30 वक्फ बोर्ड हैं। दो तरह के वक्फ बोर्ड देश में दो तरह के वक्फ बोर्ड होते हैं। पहला पब्लिक और दूसरा निजी वक्फ बोर्ड। वक्फ बोर्ड में होने वाले अतिरिर्त मुनाफे को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों में बांट दिया जाता है। वहीं निजी वक्फ प्रॉपर्टी किसी की भी हो सकती है। वक्फ प्रमाणीकरण अधिनियम 1913 के तहत कोई भी व्यक्ति, जो मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखता हो, अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए प्राइवेट वक्फ बना सकता है। वक्फ बोर्ड में कई चीजें शामिल होती हैं, जैसे चल-अचल संपत्ति, कंपनियों के शेयर, किताबें, पैसे, जमीनें , जेवर आदि।
Source: OneIndia Hindi

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