Ayodhya Verdict: ऐसा हो सकता हैं अयोध्‍या में राममंदिर का स्‍वरुप

India oi-Bhavna Pandey |

Published: Saturday, November 9, 2019, 16:01 [IST]
बेंगलुरु। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्‍या राममंदिर विवाद पर अपना ऐहिहासिक फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कह दिया कि अयोध्या की विवादित ढांचे वाली जमीन पर मंदिर बनेगा। माना जा रहा है कि अब अयोध्‍या में राम मंदिर के निर्माण का जल्द ही शुरु हो जाएगा। इस फैसले के बाद सभी रामभक्तों में उत्‍सुकता हैं कि पांच सदी के बाद जो रामलला का मंदिर बनेगा उसका स्‍वरुप कैसा होगा ? आइए जानते हैं यह कैसा और कितना भव्‍य होगा। बता दें विश्‍व हिंदू परिषद ने फैसला आने से पहले ही दावा किया था कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला राममंदिर के निर्माण के पक्ष में आता हैं तो छह महीनों के अंदर राममंदिर का ढ़ाचा खड़ा कर देंगे। गौरतलब है कि रामजन्‍मभूमि पर प्रस्‍तावित राममंदिर बनाने के लिए वर्ष सिंतबर 1990 में विहिप द्वारा आयोध्‍या में रामघाट स्थित रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला की स्थापना की गयी। इस कार्यशाला को स्‍थापित करने के लिए मंदिर आंदोलन के शलाका पुरुष परमहंस रामचंद्रदास ने जमीन दान दी थी। कार्यशाला में ही प्रस्तावित मंदिर के मॉडल के साथ पूजित शिलाएं व तराशी गईं शिलाएं भी रखीं हैं। परमहंस के साथ मंदिर आंदोलन के प्रमुख अशोक सिंहल, आचार्य गिरिराज किशोर, महंत नृत्यगोपाल दास, संघ विचारक मोरोपंत पिंगले आदि ने कार्यशाला की आधारशिला रखी थी। विश्‍व हिंदू परिषद ने मंदिर निर्माण कार्यशाला में 1990 में यहां राम मंदिर के निर्माण के लिए पत्थरों को तराशने का काम शुरु करवाया था। तब से लेकर अब तक लगातार पत्थरों को तराशने का काम चल रहा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले विहिप ने यह काम बंद कर दिया था। 1990 के बाद पहली बार पत्थरों को तराशने का काम बंद किया गया था। ऐसा अयोध्‍या पर आने वाले फैसले को ध्‍यान में रखते हुए किया गया था।विहिप के प्रस्तावित इस मंदिर मॉडल के भूतल के पत्थरों की तराशी का कार्य हो चुका है। अयोध्‍या में 1990 में कार्यशाला स्‍थापित की गई थी। दो मंजिला राममंदिर बनने में 1 लाख 75 हजार घनफुट पत्थर लगना है। इस कार्यशाला में पिछले 28 वर्षों से देश के कोने कोने से आए उच्‍चकोटि के कारीगारों द्वारा तराश कर पत्थरों को तराशा जा चुका है। कार्यशाला में करीब एक लाख घनफुट पत्थरों की तराशी का कार्य पूरा कर चुके हैं। दो मंजिला होगा यह राम मंदिर रामजन्‍मभूमि की नाप आदि लेने के बाद प्रस्‍तावित मंदिर का नक्शा तैयार करने में पूरे तीन माह का समय लगा था। नक्शा तैयार होने के बाद विहिप के शीर्ष नेताओं, संतों और अखाड़ों के प्रमुखों को यह नक्शा दिखाया गया। जिस पर सहमति बनी थी। इसी नक्शे के अनुसार मंदिर का निर्माण किया जाएगा। रामलला का जो क्षेत्र है, वह करीब 77 एकड़ में है। रामजन्‍मभूमि पर राममंदिर बनाने के लिए विहिप ने जो नक्शा बनबाया है, वह मंदिर दो मंजिल का होगा। जिसमें प्रथम मंजिल की ऊंचाई 18 फीट एवं दूसरी मंजिल की ऊंचाई 15 फीट नौ इंच होगी। प्रस्‍तावित मंदिर 268 फीट लंबा है। जिसकी चौड़ाई करीब 140 फीट होगी। मंदिर की उंचाई 128 फीट है। रामचरितमानस में वर्णित राम के हर रूप की मूर्तियां रामजन्मभूमि न्यास ने 1992 में लगभग 45 एकड़ में रामकथा कुंज बनाने कि योजना बनाई थी। जिसमें राम के जन्म से लेकर लंका विजय और फिर अयोध्या वापसी तक के स्वरूप को पत्थरों पर उकेरा जाएगा। 125 मूर्तियां बनाई जानी हैं। अब तक करीब 24 मूर्तियां तैयार हो चुकी हैं। रामचरितमानस में वर्णित राम के हर रूप की मूर्तियां लगेंगी। रामजन्मभूमि न्यास ने 1992 में लगभग 45 एकड़ में रामकथा कुंज बनाने कि योजना बनाई थी। इसमें राम के जन्म से लेकर लंका विजय और फिर अयोध्या वापसी तक के स्वरूप को पत्थरों पर उकेरे दिखेंगे। रामजन्मभूमि के पार्श्व में प्रवाहित मां सरयू, आग्नेय कोण पर विराजमान हनुमानजी, अयोध्यावासी और श्रद्धावनत साधक विराजित किए जाएंगे। जिसकी कल्‍पना पिछली पांच सदी से होती रही है। मंदिर के पांच प्रखंड होंगे। जिनमें अग्रभाग, सिंहद्वार, नृत्यमंडप, रंगमंडप और गर्भगृह के रूप में मंदिर होगा। मंदिर में कुल 212 स्तंभ लगेगे। मंदिर के प्रथम तल पर 106 स्‍तंभ होंगे और इतने ही स्‍तंभ दूसरी मंजिल पर होगा। मंदिर की पहली मंजिल पर लगने वाले स्‍तंभों की ऊंचाई 16 फीट छह इंच होगी वहीं दूसरी मंजिल पर लगने लगने वाले स्‍तंभों की ऊंचाई 14 फीट छह इंच होगी। प्रत्‍येक स्‍तंभ पर यक्ष-यक्षिणियों की 16 मूर्तियां और अन्य कलाकृतियां दिखायी देगी। इनका व्यास चार से पांच फीट तक रहेगा। गर्भगृह में विराजित रहेंगे रामलला रामजन्‍मभूमि पर बनने वाले दो मंजिला मंदिर के गर्भगृह में रामलला विजराजित रहेंगे। मंदिर के जिस कक्ष में रामलला विराजेंगे, उसी गर्भगृह से ठीक ऊपर 16 फीट तीन इंच का विशेष प्रकोष्ठ होगा। इसी प्रकोष्ठ पर 65 फीट तीन इंच ऊंचा शिखर निर्मित किया जाएगा। इस प्रस्तावित मंदिर में एक लाख 75 हजार घन फीट लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग करके निर्माण किया जाएगा। प्रथम तल के पत्थरों की शिफ्टिंग के साथ ही गर्भगृह को आकार दिया जाएगा। जहां रामलला की प्रतिष्ठा होगी। कार्यशाला में तराशे गए पत्थरों को दूसरे तल पर शिफ्ट करने में लगभग 6 माह का समय लगेगा। इसलिए माना जा रहा हैं कि मंदिर बनने में लगभग ढ़ाई वर्ष का समय लग सकता हैं। गौर करने वाले बात हैं कि भगवान राम के इस मंदिर के पत्थरों को ईंट-गारा की बजाय कॉपर और सफेद सीमेंट से जोड़ा जाएगा। 1992 से अस्‍थाई मंदिर में विराजित हैं रामलला वर्ष छह दिसंबर वर्ष 1992 से रामजन्‍मभूमि में टेंट में बने अस्‍थाई मंदिर में रामलला विराजमान हैं। इस अस्‍थाई मंदिर की नींव कारसेवकों द्वारा विवादित ढांचे को गिराए जाने के बाद रखी गयी थी। विहिप ने वर्ष 1984 में विवादित स्थल का ताला खोलने और एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया था। 1 फरवरी वर्ष 1986 में जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिंदुओं को पूजा की इजाजत दे दी थी। जिसके बाद विवादित इमारत का ताला दोबारा खोला गय था। वर्ष 1992 में छह दिसंबर को कारसेवकों द्वारा विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद वहां 80 फीट लंबा, 40 फीट चौड़ा व करीब 16 फीट ऊंचा अस्थाई मंदिर बनाया गया। वर्ष 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति कायम रखने का आदेश जारी किया। जिसके बाद से इस अस्‍थाई मंदिर में विराजित राम भगवान की पूजा अर्चना की जा रही हैं। अब सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले के बाद यह राममंदिर बनने का सपना पूरा हो सकेगा जहां रामलला विराजेंगे।
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Source: OneIndia Hindi

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