गंगा में प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ मोदी सरकार सख्त, घाटों पर तैनात होगी फोर्स, लगेगा भारी जुर्माना और होगी जेल

गंगा को बचाने के लिए मोदी सरकार का प्लान द प्रिंट की खबर के मुताबिक गंगा नदी की सुरक्षा के लिए बनने वाला सशस्त्र बल(जेपीसी) गृह मंत्रालय के अधीन होगा। जेपीसी नए मसौदा कानून राष्ट्रीय नदी गंगा (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) विधेयक, 2019 का ही हिस्सा है। मोदी सरकार इस बिल को शीतकालीन सत्र में संसद पेश करने के बारे में सोच रही है । इस बिल में गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने की भी बात कही गई है। 2017 से बन रहा है रुल्स ड्राफ्ट गंगा नदी को संरक्षित करने वाला ये मसौदा कानून साल 2017 से तैयार किया जा रहा है। इसे परामर्श के लिए इससे संबंध रखने वाले मंत्रालयों को भेजा जा रहा है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि इसे जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। गौरतलब है कि साल 2014 में केंद्र की सत्ता हासिल करने आने के बाद मोदी सरकार ने गंगा सफाई के विशेष विभाग का गठन किया था। ये विभाग जल संसाधन मंत्रालय के अधीन काम करता था। साल 2015 में गंगा नदी की सफाई के लिए ‘नमामि गंगे’ प्रोजेक्ट शुरू किया था। जिसका बजट 20,000 करोड़ रुपये था। जीपीसी को मिलेगी ये पावर जेपीसी सीआरपीसी के तहत काम करेगी। जेपीसी के पास गंगा में गंदगी फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की ताकत होगी। इसके अलावा बिना अनुमति के नदी खनन, भूजल निकालने या तटों पर अवैध निर्माण करने वालों को भी जेपीसी गिरफ्तार कर सकेगी। इस मसौदे में गंगा को प्रदूषित करने और उसके प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करने पर कठोर दंड का प्रावधान है। बिना किसी परमिशन के निर्माण गतिविधियों पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना और दो साल की सजा का प्रावधान है। खनन करने और भूजल निकालने पर र 50,000 रुपये तक का जुर्माना और डेढ़ साल तक की कैद होगी। घाटों को गंदा करने पर एक साल की जेल और 25000 रुपये जुर्माना लगेगा।
Source: OneIndia Hindi

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