भारत ने अपने नए नक्शे में कालापानी को दिखाया, नेपाल ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली: नेपाल ने भारत की ओर से जारी देश के नए राजनीतिक मानचित्र में कालापानी को उसकी सीमा में कथित तौर पर दिखाए जाने पर आपत्ति जताई है. नेपाल सरकार ने बुधवार को कहा कि देश के सुदूर पश्चिमी इलाके स्थित कालापानी नेपाल की सीमा में है. भारत ने बीते शनिवार को नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया था जिसमें नवगठित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश को उनकी सीमाओं के साथ दिखाया गया है. मानचित्र में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को नवगठित जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के हिस्से के रूप में दिखाया गया है जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान को लद्दाख के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया गया है.

Maps of newly formed Union Territories of #JammuKashmir and #Ladakh, with the map of #India
Details: https://t.co/Hf1Mn9iZDo pic.twitter.com/3fIeXR59rK
— PIB India (@PIB_India) November 2, 2019

विदेश मंत्रालय ने जताई आपत्ति
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में ‘कालापानी’ को नेपाल का अभिन्न अंग बताया. मीडिया को जारी बयान में नेपाल सरकार ने कहा कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के स्तर वाली नेपाल-भारत साझा आयोग की बैठक में अनसुलझे सीमा विवाद का समाधान ढूंढने की जिम्मेदारी दोनों देशों के विदेश सचिवों पर छोड़ी गई.
नेपाल ने साफ किया कि बिना आपसी सहमति के भारत सरकार की ओर से लिया गया कोई भी फैसला उसे मंज़ूर नहीं है. बयान में कहा गया, ‘सीमा को लेकर लंबित मुद्दों को द्विपक्षीय सहमति से सुलझाया जाना चाहिए और कोई भी इकतरफा कार्रवाई नेपाल सरकार को अस्वीकार्य होगी.’
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अभी भारत के विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया का इंतजार
नेपाल सरकार ने कालापानी को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में दिखाने पर आपत्ति जताई. नेपाल का दावा है कि कालापानी क्षेत्र नेपाल के दारचुला जिले का हिस्सा है.
नेपाल से जुड़े घटनाक्रमों पर अभी भारत के विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया आना बाकी है. नेपाल का कहना है कि दोनों देशों ने आपसी संबंधों में काफी प्रगति की है. लेकिन सीमा जैसे संवेदनशील मुद्दों को सतर्कतापूर्वक देखने की आवश्यकता है.
नेपाल विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘नेपाल सरकार देश की बाहरी सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. साथ ही इस सैद्धांतिक स्थिति पर कायम है कि पड़ोसी देशों के साथ इस तरह के सीमा विवादों का ऐतिहासिक दस्तावेज. तथ्यों और सबूतों की रोशनी में राजनयिक चैनलों के जरिए समाधान निकालना चाहिए.’
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Source: HW News

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