मुंबई की पहचान ‘काली-पीली पट्टी वाली टैक्सी’ जल्द बन जाएगी इतिहास

ऐसा रहा प्रीमियर पद्मिनी का शानदार सफऱ साल 1964 में, Fiat 1100 का स्वदेशी वर्जन इस गाड़ी को बतौर Fiat 1100 Delight बाजार में उतारा गया। लॉन्च के एक साल बाद इसका नाम बदलकर प्रीमियर प्रेसीडेंट रख दिया गया। इसके बाद 1974 में इसका एक बार और नामकरण हुआ और इस बार यह बन गई प्रीमियर पद्मिनी। यह नाम एक भारतीय रानी के नाम पर रखा गया। अगले 30 सालों तक कार ने अपने नाम को बखूबी साबित किया। जल्द ही ये टैक्सी मुंबई की पहचान बन गई। 70 और 80 के दशक में आसमान की बुलंदी पर पहंची ये टैक्सी टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई अधिकारियों ने 60 के दशक में एम्बेसडर की जगह पद्मिनी को तरजीह दी थी। इसके पीछे की अहम वजह उसकी स्लीक डिजाइन और हल्की कदकाठी मुंबई के संकरे और भीड़-भाड़ वाले रास्तों के लिए उपयोगी साबित हुई। जबकि उस समय दिल्ली और कोलकाता में एम्बेसडर के नाम की ही धूम थी। इस टैक्सी की पॉपुलैरिटी में 70 और 80 के दशक में आसमान पर पहुंच गई। 90 के दशक में 63,200 रिकॉर्ड टैक्सी ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में रजिस्टर हुई थीं। पद्मिनी कार के ड्राइवर कार से इमोशनी तौर पर जुड़े हुए हैं साल 2013 में सरकार ने प्रदूषण के चलते बीस साल से पुराने वाहन को सड़क से हटाने का निर्देश दिया। ऐसे में पद्मिनी कार जल्द ही इतिहास का हिस्सा हो जाएगी। पद्मिनी कार के ड्राइवर कार से इमोशनी तौर पर जुड़े हुए हैं। टीओआई से बात करते हुए, एक टैक्सी चालक ने कहा, हमें हमेशा यात्रियों से इसकी प्रशंसा मिली है। जिसका कारण इसका अच्छा लेग स्पेस, सस्पेंशन और यात्रियों के लिए आरामदायक सफर।
Source: OneIndia Hindi

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