अमृतसर दशहरा हादसा: एक साल बाद भी दोषियों को नहीं मिली सजा, न पीड़ितों को नौकरी 

नई दिल्ली: जहां पूरे देश में मंगलवार को धूमधाम से दशहरे का त्यौहार मनाया गया, वहीं पंजाब के अमृतसर में लोगों के ज़ेहन में पिछले साल दहशरे के दिन हुए दर्दनाक रेल हादसे की यादें ताजा हो गई. बता दें कि, पिछले साल दशहरे के दिन पंजाब के जौड़ा फाटक पर दशहरा देख रहे लोगों को ट्रेन ने कुचल दिया था. हादसे में 60 लोगों की जान गई थी, जबकि 143 लोग घायल हो गए थे.

Punjab: Families of the victims of 2018 Amritsar train accident take out a protest march in Amritsar; say “It has been a year but justice has not been meted out to us yet. So we are going to sit on protest on railway track. We had to do several rounds of offices the entire year.” pic.twitter.com/KFPG3mcHp8
— ANI (@ANI) October 8, 2019

हादसे के एक साल बीत जाने के बाद भी पीड़ितों के परिवारवाले पीड़ितों के रिश्तेदारों को दिलाए गए सरकारी नौकरी के आश्वासन और दोषियों पर कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं.

रेल हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों ने मंगलवार को जोड़ा फाटक तक कैंडल मार्च निकाला और हादसे का शिकार हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी. कैंडल मार्च के दौरान पीड़ित परिवारों ने कहा कि पीड़ित परिवारों के घर में खाने को रोटी तक नहीं है. सरकार ने नौकरी का वादा भी अभी तक पूरा नहीं किया है. साथ ही आरोपियों को सजा दी जाए.

इस दौरान अकाली दल नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी कैंडल मार्च में लोगों का साथ दिया. मजीठिया का कहना है कि पंजाब सरकार ने झूठे वादे किए और आरोपियों के खिलाफ कर्रवाई नहीं की. उन्होंने कहा कि आरोपियों पर सरकार कार्रवाई करे और वादे के मुताबिक पीड़ित परिवारों को नौकरी दे.

क्या है अमृतसर दशहरा हादसा मामला?
साल 2018 में दशहरा के दिन अमृतसर के जोड़ा फाटक पर रेल की पटरियों पर सैंकड़ों लोग मौजूद थे. अमृतसर के जोड़ा फाटक के पास दशहरा का आयोजन हो रहा था और रावण का पुतला जलाया जा रहा था. इसी दौरान रेलवे ट्रैक पर लोग खड़े हुए थे. लेकिन तभी अचानक ट्रेन आ गई और देखते ही देखते वहां लाशों का ढेर लग गया.

पठानकोट से आ रही डीएमयू ट्रेन उस ट्रैक पर खड़े सभी लोगों को रौंदते हुए चली गई और ट्रैक के इर्द-गिर्द लाशें ही दिखाई दे रही थीं. वहीं सामने ही रावण जल रहा था और लोग चीख रहे थे. इस हादसे में 60 लोगों की मौत हो गई थी जबकि हादसे में 143 घायल हो गए थे. घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि ट्रेन की स्पीड बहुत ज्यादा थी.
वहीं इस हादसे के दौरान नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी वहां मुख्य अतिथि थीं. पीड़ित परिवारों का कहना है कि हादसे के बाद पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी ने पीड़ित परिवारों के लोगों को गोद लेने, आश्रित परिवारों के एक सदस्य को नौकरी देने और इलाज का खर्च देने का वादा किया था.
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Source: HW News

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