Blood Pressure During Pregnancy: जानिए क्‍यों गर्भवती महिलाओं में बढ़ रहे High Blood Pressure के मामले

Publish Date:Wed, 11 Sep 2019 01:24 PM (IST)

न्यूयॉर्क, आइएएनएस। Blood Pressure During Pregnancy: गर्भवती महिलाओं में हाई बीपी यानी उच्च रक्त चाप के मामलों में वृद्धि चिंता का विषय है। एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि वर्ष 1970 के बाद 35 वर्ष की गर्भवती महिलाओं में बल्ड प्रेशर (क्रॉनिकल हाइपरटेंशन) के मामलों में 75 फीसदी वृद्धि हुई है।
हाइपरटेंशन नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने वर्ष 1970 से 2010 के बीच 151 मिलियन यानी 15.1 करोड़ गर्भवती महिलाओं के रिकॉर्ड का अध्ययन कर यह दावा किया है। रटगर्स यूनिवर्सिटी में भारतीय मूल के शोधकर्ता और इस अध्ययन के नेतृत्व करने वाले वी. अनंत ने कहा कि अध्ययन के दौरान पता चला कि जिन महिलाओं के बच्चे वर्ष 1970-80 के बीच हुए थे, वे महिलाएं गर्भावस्था के दौरान सबसे ज्यादा हाइपरटेंशन से ग्रस्त थीं।

शोधकर्ताओं ने मुताबिक, मातृत्व की आयु और क्रॉनिकल हाइपरटेंशन के बीच के एक संबंध होने के कारण ये मामले हर साल औसतन छह फीसद बढ़ जाते हैं। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जो महिलाएं हाइपरटेंशन का शिकार थीं, उनमें अन्य के मुकाबले मोटापे की शिकायत भी ज्यादा देखने को मिली और धूमपान और ड्रग्स लेने के कारण क्रॉनिकल हाइपरटेंशन का जोखिम और बढ़ जाता है। अनंत ने कहा कि क्रॉनिकल हाइपरटेंशन से निपटने के लिए महिलाओं को चाहिए कि व गर्भवती होने से पहले अपने रक्तचाप को नियंत्रित रखें, धूमपान छोड़ें। इससे गर्भावस्था के दौरान महिला और बाद में उनके नवजात शिशु का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।

संभावित कारण

गर्भवती में हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत गर्भावस्था के चलते उत्पन्न होती है।
कुछ महिलाओं में हाई ब्लडप्रेशर की शिकायत गर्भावस्था के पहले से ही होती है।
कई बार गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप की शिकायत किडनी से संबंधित बीमारी, मोटापा, चिंता और मधुमेह आदि के कारण होती है।
नेशनल हार्ट, लंग और ब्‍लड इंस्टिट्यूट के अनुसार, गर्भावस्‍था के दौरान ब्‍लड प्रेशर कई संभावित कारणों से बढ़ सकता है। इन कारणों में अस्‍वस्‍थ जीवनशैली, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी शामिल है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में उच्च रक्तचाप और एक्लंप्षण के जोखिम को कम करने के लिए गर्भाधारण से पहले और गर्भाधारण के दौरान बचाव के उपायों को अपनाना चाहिए।

इन लक्षणों का रखें ध्‍यानगर्भावस्‍था के दौरान, आपका डॉक्‍टर नियमित रूप से आपके ब्‍लड प्रेशर पर नजर रखता है। अगर आपका सिस्टोलिक दबाव 140 से अधिक और डायस्टोलिक प्रेशर 90 से अधिक हो जाता है, यह एक समस्या का संकेत हो सकता है। प्रीक्‍लेम्‍पसिया का हाई ब्‍लड प्रेशर के रूप में निदान करना उतना आसान नही है। इसके साथ ही आपका डॉक्‍टर भ्रूण की नॉर्मल हार्ट रेट और मूवमेंट को जानने के लिए नॉन-स्‍ट्रेस टेस्‍ट करवाता है। भ्रूण के स्‍वास्‍थ्‍य की जांच करने के लिए अल्‍ट्रासाउंड भी किया जा सकता है।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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Source: Jagran.com

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