सुप्रीम कोर्ट ने कहा – समाज के लिए बेहतर है अंतर-जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि अगर दो लोग कानून के तहत शादी करते हैं तो हिंदू-मुस्लिम विवाह भी स्‍वीकार्य है. इसमें लोगों को क्‍या समस्‍या हो सकती है?

Utkarsh Anand | News18Hindi

Updated: September 11, 2019, 2:25 PM IST

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने साफ कर दिया है कि वह अंतर-धार्मिक (Inter Faith) और अंतर-जातीय विवाह (Inter Caste Marriage) के खिलाफ नहीं हैं. साथ ही कहा कि इस तरह की शादियों से समाजवाद को बढ़ावा मिलेगा. जस्टिस अरुण मिश्रा (Justice Arun Mishra) और एमआर शाह (Justice MR Shah) की पीठ (Bench) ने कहा कि अगर दो लोग कानून के तहत शादी करते हैं तो हिंदू-मुस्लिम विवाह (Hindu-Muslim Marriage) भी स्‍वीकार्य है. इसमें लोगों को क्‍या समस्‍या हो सकती है? जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अगर इस तरह की शादियों से जातीय भेद खत्‍म होता तो ये अच्‍छा है. कथित ऊंची और और नीची जातियों के लोगों के बीच विवाह होना चाहिए. ऐसी शादियां समाजवाद (Socialism) के लिए अच्‍छी हैं.’हम महिलाओं का भविष्‍य करना चाहते हैं सुरक्षित’पीठ ने कहा कि लिव-इन संबंधों को कोर्ट ने पहली ही स्‍वीकार्यता दे दी है. लिहाजा, अंतर-धार्मिक और अंतर-जातीय विवाह पर बहस की कोई जरूरत नहीं है. पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे दंपतियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित कराना चाहता है्. हम ऐसी शादियों में महिलाओं के भविष्‍य को लेकर चिंतित हैं. हम उनके भविष्‍य को सुरक्षित करने की कोशिश करना चाहते हैं. पीठ ने ये सभी बातें छत्‍तीसगढ़ के एक व्‍यक्ति की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहीं. याची ने अपनी बेटी के अंतर-धार्मिक विवाह के खिलाफ याचिका दायर की थी. मामले में मुस्लिम युवक ने हिंदू लड़की से विवाह करने के लिए धर्म परिवर्तन कर लिया था.लड़की के पिता का आरोप, धोखा देकर की शादीछत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दंपति को साथ रहने की अनुमति दे दी थी. इसके बाद लड़की के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. लड़की के पिता ने याचिका में आरोप लगाया है कि उसकी बेटी को एक रैकेट ने फंसाया है और यह शादी धोखेबाजी से की गई है. याची की ओर से पेश वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि छत्‍तीसगढ़ में इस तरह का एक रैकेट चलाया जा रहा है. लिहाजा, सुप्रीम कोर्ट को मामले में हस्‍तक्षेप करना चाहिए.बचाव पक्ष ने शादी की जांच का किया विरोधधर्म परिवर्तन कर हिंदू लड़की से विवाह करने वाले मुस्लिम लड़के की ओर से पेश वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता राकेश द्विवेदी और लड़की की ओर से पेश गोपाल शंकरनारायण ने केरल के हंडिया के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसला का का हवाला देते हुए दोनों की शादी की जांच का विरोध किया. पीठ ने स्‍पष्‍ट किया कि इस मामले में दोनों के विवाह की जांच नहीं की जाएगी. शीर्ष अदालत इस मामले में लड़की के हितों की रक्षा को सुनिश्चित करना चाहती है. कोर्ट ने राज्‍य सरकार और अन्‍य से इस बारे में जवाब तलब किया है. मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी.Loading… ये भी पढ़ें: सबसे बड़े चालान में बड़ी गलती, रसीद में जमाकर्ता का नाम कर दिया ‘भगवान राम’जम्‍मू-कश्‍मीर में अगले महीने होंगे BDC चुनाव! सूबे में सामान्‍य हालात के दावों का होगा पहला परीक्षण

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First published: September 11, 2019, 2:07 PM IST

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Source: News18 News

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