हिंदू मंदिरों में की गई शादी वैध होती है या नहीं

क्या हिंदू मंदिरों में की गई शादी वैध होती है,जानिए क्या कहता है शादी-व्याह से हिंदू मैरिज एक्ट 1955

RajKumar Pandey | News18 Uttar Pradesh

Updated: July 15, 2019, 8:47 AM IST

बरेली के विधायक राजेश मिश्रा की बेटी साक्षी मिश्रा ने प्रयागराज के राम जानकी मंदिर में अजितेश कुमार से शादी कर ली. अपनी शादी के समर्थन में उन्होंने मंदिर के किसी कर्मकांड विशेषज्ञ की एक चिट्ठी पेश की. इसे उन्होंने शादी का प्रमाण पत्र कहा. जब मामला मीडिया में आई तो मंदिर के गद्दीनशीन महंत से पूछा गया. इस पर महंत ने कह दिया कि उनके मंदिर में शादी हुई ही नहीं है. इसके बाद से एक सवाल उठने लगा था कि क्या मंदिर में शादी होती है.इस बारे में कानून क्या कहता है. इसे समझने के लिए देश के कानून में हिंदू विधि है. हिंदुओं की शादी-व्याह के मामले इसी विधि के अनुसार निपटाए जाते हैं. हिंदू विवाह अधिनियम 1955 नाम के इस कानून की धारा 7 में विवाह के लिए सिर्फ एक तथ्य को जरूरी बताया गया है. इसके मुताबिक सप्तपदी होनी चाहिए. धारा 7 में विवाह और तलाक के बारे बहुत विस्तार से लिखा गया है. इसी के मुताबिक विवाह को वैध और अवैध माना जाता है.हाई कोर्ट के वकील विक्रांत पांडेय के मुताबिक “विवाह के वैध होने के लिए सप्तपदी होनी चाहिए.” सप्तपदी को और स्पष्ट किया जाए तो अग्नि जला कर उसके चारो ओर सात फेरे लेना जरूरी हैं. व्रिकांत पांडेय और साफ करते हैं कि सप्तपदी का सुबूत पुरोहित की गवाही होती है. पुरोहित जिसने शादी कराई हो.फिर मंदिर में शादी कराए जाने या न कराए जाने के सवाल पर इस कानून में कोई व्यवस्था नहीं है. वकील विक्रांत के मुतबिक आज के दौर में जब कहीं भी किसी गेस्ट-हाउस से लेकर किसी पंडाल में शादी कराई जा रही है तो वहीं वेदिका बना कर आग के सात फेरे कराए जाते हैं. इसमें स्थानीय प्रचलित रीति-नीति के अनुसार मामूली फेरबदल होता है, लेकिन मूल सात फेरे ही होते हैं. ये फेरे किसी भी स्थान पर हो सकते हैं. कोई चाहे तो मंदिर में भी कर सकता है.उन्होंने कहा कि अब मंदिर के संचालक और प्रबंधक उसे करने देते हैं या नहीं ये उनका विषय है, लेकिन कोई शादी सिर्फ इस कारण अवैध या अमान्य नहीं हो सकती कि वो मंदिर में कराई गई है.मंदिर के गद्दीनशीन मठाधीश की मीडिया में आई बात पर वकील विक्रांत का कहना है कि “शादी कराने वाले पंडित की गवाही जरूरी है. मंदिर के मठाधीश की नहीं.” उनके मुताबिक ये सवाल बाद का है और अलग है कि उस मठाधीश के मंदिर में कोई दूसरा पुजारी या पुरोहित कैसे गया. इसका शादी से कोई मतलब नहीं है. शादी कराने वाला अगर ये प्रमाणित कर पाता है कि उसने शादी कराई थी और सात फेरे लिए गए, तो शादी वैध होगी. अगर वो पुरोहित कहता है कि सात फेरे नहीं लिए गए तो शादी शून्य और अवैध होगी. मतलब मान लिया जाएगा कि शादी हुई ही नहीं.यहां ये भी ध्यान रखने वाली बात है कि कुछ क्षेत्रों में लोग वर वधु को आगे पीछे करके अग्नि के फेरे लगाते हैं तो कुछ स्थानों पर उनके किसी कपड़े को लेकर उन्हीं से फेरे करा दिए जाते हैं. दोनो स्थितियों में अपनी अपनी परंपरा के अनुसार सप्तपदी पूरी मानी जाती है. लेकिन इसका मुख्य साक्षी पंडित या पुरोहित ही होता है.इससे अलग आर्यसमाज मंदिरों को विवाह कराने और विवाह का प्रमाण पत्र देने का विशेष अधिकार है. इसे आर्य मंदिर वैलिडेशन एक्ट के तहत अधिकार दिए गए हैं. ये अलग कानून है और जो लोग लंबी हिंदू परंपराओं से बच कर शादी और दूसरी रीतियां करना चाहते हैं वे इसके तहत भी करते है. उन्हें आर्यसमाज मंदिर की ओर से प्रमाण पत्र भी दिए जाते हैं.Loading… फिलहाल साक्षी की शादी में अब तक जो कुछ देखने सुनने को मिला है उसके अनुसार साक्षी और उसका पति चाहे जो भी गुहार लेकर हाईकोर्ट गया हो दूसरे पक्ष की ओर से उसकी शादी पर सवाल उठने की ज्यादा संभावना है. इस मामले में हाई कोर्ट का आने वाला निर्णय भी इस तरह की शादियों के एक नजीर बन सकता है.ये भी पढ़ें – लव मैरिज मामला: HC में पेश होंगे साक्षी और अजितेश, लगाई है सुरक्षा की गुहारगायों की मौतों पर CM योगी सख्त, अयोध्या व मिर्जापुर के 8 अफसर सस्पेंड

Loading…

Source: News18 News

Related posts