Chandrayaan-2 से जुड़ीं ‘रॉकेट वुमेन’ रितु करिधाल श्रीवास्तव कौन हैं, जानिए

1997 से इसरो से जुड़ी हैं रितु लखनऊ के राजाजीपुरम में एक मध्यम वर्गीय परिवार में पलीं-बढ़ीं रितु ने यहीं के नवयुग गर्ल्स कॉलेज से इंटर करने के बाद हाइयर स्टडीज के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया था। उन्होंने यहीं से फिजिक्स से ग्रैजुएशन और फिर पीजी किया। इसके बाद उन्होंने गेट (जीएटीई) पास करके बेंगलुरु में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज (आईआईएससी) में एडमिशन लिया। वहां से रितु ने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1997 में वो इसरो से जुड़ गईं। ‘रॉकेट वुमेन’ के नाम से लोकप्रिय हैं भारत की ‘रॉकेट वुमेन’ के नाम से लोकप्रिय रितु इससे पहले मार्स मिशन या मंगलयान की भी डिप्टी ऑपरेशन्स डायरेक्टर रह चुकी हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक जब रितु करिधाल को चंद्रयान-2 की मिशन डायरेक्टर बनाए जाने की खबर लखनऊ यूनिवर्सिटी पहुंची तो वहां के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। फिजिक्स डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि, “कितना गर्व महसूस होता है कि हमारी छात्र ने न सिर्फ आसमान छू लिया है, बल्कि स्पेस में उससे भी कहीं दूर पहुंच चुकी है। जैसे ही खबर मिली उनके सभी फैकल्टी मेंबर्स ने उनकी कामयाबी पर जश्न मनाया, जिन्होंने उन्हें ग्रैजुएशन और पोस्ट ग्रैजुएशन में पढ़ाया है।” निजी जीवन में घरेलू और काम में बेहद प्रोफेशनल हैं रितु ने जिस वातावरण में इतनी ऊंचाइयां छू ली हैं, वह किसी के लिए भी प्रेरणादायक हो सकती है। अपने माता-पिता के निधन के बाद उन्होंने अपने छोटी बहन वर्षा और छोटे भाई रोहित की अच्छी तरह से परवरिश की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी बेटी अनिषा, बेटे आदित्य और पति अविनाश की देखभाल में भी कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने जिस तरह से पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के बीच बैलेंस बनाया है, वह किसी मिसाल से कम नहीं है। उनके भाई-बहन कहते हैं, दीदी निजी जीवन में जितनी ही पारंपरिक हैं, स्पेस मिशन को हैंडल करने में उतनी ही प्रोफशन भी हैं। खुद रितु कहतीं हैं कि, तारों ने उन्हें हमेशा अपनी ओर आकर्षित किया। वो हमेशा सोचा करती थीं कि अंतरिक्ष के अंधेरे के उस पार क्या है? विज्ञान उनके लिए विषय नहीं जुनून था।
Source: OneIndia Hindi

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