‘कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य, सभी मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दें इस्तीफा’

Congress Rajya Sabha MP Pratap Singh Bajwa: Whatever decision Rahul Gandhi will take to improve Congress’ image, we are with him. I feel all the senior leaders, whether they are Congress working committee members or present Chief Ministers or state presidents, they should resign. pic.twitter.com/f3A8RCnlwl
— ANI (@ANI) June 30, 2019 कांग्रेस के बड़े नेताओं पर इस्तीफे का बढ़ा दबाव कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि ‘पार्टी की इमेज बेहतर करने के लिए राहुल गांधी जो भी फैसला करेंगे, हम लोग उनके साथ हैं। मझे लगता है कि वरिष्ठ नेताओं को, चाहे वे कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य हों या मौजूदा मुख्यमंत्री या फिर प्रदेशों के अध्यक्ष हों, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।’ पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बाजवा ने एआईसीसी की विवेश मामलों से जुड़ी समिति के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी के सीनियर नेताओं को ये सलाह दी है। बाजवा का भरोसा बाजवा ने पार्टी नेताओं को ये भी भरोसा देने की कोशिश की है कि जिन्होंने अच्छा काम किया है, उनका इस्तीफा राहुल गांधी निश्चित तौर पर स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को काम करने की आजादी मिलनी चाहिए। बाजवा ने कहा कि पिछले 70 सालों में से 50 साल कांग्रेस ने देश में सरकार चलाई है, इसलिए कार्यकर्ताओं को निराश होने की जरूरत नहीं है। बीजेपी 1984 में दो सीटों वाली पार्टी थी, लेकिन उसने आगे बढ़ने के लिए मेहनत की है। कांग्रेस में इस्तीफा संकट कांग्रेस में इस वक्त एक अजीब सी स्थिति बनी हुई है। छोटे नेताओं की ओर से तो इस्तीफे की पेशकश हो रही हैं, लेकिन बड़े नेता अपने पद से चिपके हुए हैं। राहुल गांधी के खुद के इस्तीफे की स्थिति पर भी पार्टी कुछ भी साफ नहीं कर पा रही है। एक महीना से ज्यादा गुजर चुका है, लेकिन इस्तीफे की पेशकश के बाद भी राहुल का कोई उत्तराधिकारी कांग्रेस तय नहीं कर पाई है। क्योंकि, कांग्रेस में कागज पर कोई भी बड़ा औपचारिक फैसला वर्किंग कमिटी ही लेती है, जिसके सदस्यों से भी अब इस्तीफे की मांग उठने लगी है। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि ऐसे ही नेताओं पर इस्तीफे का दबाव बनाने के लिए राहुल गांधी बार-बार इस्तीफे पर अड़े होने का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगता है कि बड़े नेता इस्तीफे का जोखिम उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
Source: OneIndia Hindi

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