Missing AN-32: आखिरकार सामने आईं लापता विमान एएन-32 की तस्वीरें, घने जंगलों में जारी है एयरफोर्स का सर्च ऑपरेशन

Publish Date:Wed, 12 Jun 2019 09:52 AM (IST)

नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय वायुसेना के लापता विमान एएन- 32 के मलबे की पहली तस्वीर सामने आ गई हैं। तस्वीर में घने जंगलों के बीच विमान का मलबा पड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। वायुसेना की टीम ने सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एएन-32 के टुकड़ों को अरुणाचल प्रदेश के लिपो नाम की जगह से 16 किलोमीटर उत्तर में देखा है। फिलहाल वायुसेना का दल विमान के मलबों की जांच कर रहा है। जिसके मद्देनजर एयरफोर्स ने अब सर्च ऑपरेशन का दायरा भी बढ़ा दिया है।

Rescue operation by helicopters commences at the crash site of IAF’s AN-32. Mi17s, & Advanced Light Helicopters (ALH) of Indian Army are being utilised. (File pic) pic.twitter.com/YFpyw8cdez— ANI (@ANI)
June 12, 2019

इससे पहले आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से उस इलाके का नक्शा जारी किया गया है, जहां AN-32 विमान का मलबा मिला है। आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा जारी नक्शे में AN-32 विमान के क्रैश साइट को साफ देखा जा सकता है।

Arunachal Pradesh Government officials: Map of the site where the missing AN-32 had crashed. The Wreckage was spotted y’day 16 km North of Lipo, North East of Tato, at an approx elevation of 12000 ft,in Arunachal by IAF Mi-17 Helicopter undertaking search in expanded search zone pic.twitter.com/aaK0yvbyoo— ANI (@ANI)
June 12, 2019

वायुसेना के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार शाम मलबा दिखाई देने के बाद ही सेना ने मलबे वाले स्थान पर चीता और एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर को उतारने का प्रयास किया था, लेकिन घने पहाडी जंगल होने के चलते हेलिकॉप्टर को वहां नहीं उतारा जा सका। हालांकि, मंगलवार देर शाम तक वायुसेना ने एक जगह को चिन्हित किया। 

बता दें, 13 लोगों के साथ AN-32 मालवाहक विमान ने तीन जून की दोपहर 12.27 पर असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी और एक बजे उसका संपर्क टूट गया था। पिछले आठ दिनों से एन-32 गायब था और भारतीय वायुसेना खोजने में जुटी थी।
वायुसेना ने इस विमान की खोज के लिए इसरो तक की मदद ली। तलाशी अभियान में विशेष ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले एयरक्राफ्ट सी-130, एएन-32एस, एमआई-17 हेलिकॉप्टर और थल सेना के कई आधुनिक हेलिकॉप्टर शामिल थे। एएन-32 को खोजने में लगे सी-130जे, नेवी का पी8आई, सुखोई जैसे विमान दिन रात बहुत सारा डेटा इकट्ठा कर रहे थे। भारतीय वायुसेना का कहना था कि क्रैश की संभावित जगह से इन्फ्रारेड और लोकेटर ट्रांसमीटर के संकेतों को विशेषज्ञ पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। तस्वीरों और टेक्निकल सिग्नल के आधार पर कुछ खास बिंदुओं पर कम ऊंचाई पर हेलिकॉप्टर ले जाए जा रहे थे। लेकिन ऊपर से महज इतना हो पा रहा था कि कि वो बस जमीनी तलाशी टीम के साथ तालमेल बना पा रहे थे। जिसके चलते तलाशी अभियान में कई दिन का समय चला गया।

3 जून को गायब हुआ था विमान इस विमान ने सोमवार 3 जून को दोपहर 12.25 बजे असम के जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरी थी। इस विमान का दोपहर 1 बजे के बाद से विमान से संपर्क टूट गया। वायुसेना ने इस विमान को खोजने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया। इस अभियान के लिए सुखोई 30 एयरक्राफ्ट और सी-130 स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट को लॉन्च किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायुसेना के उप प्रमुख राकेश सिंह भदौरिया से बातचीत की। काफी देर तक जानकारी न मिलने पर सर्च अभियान में थल सेना भी भी जुट गई। सर्च अभियान में Satellites और spy planes को लगाया गयाविमान गायब होने के दूसरे दिन मंगलवार को विमान का पता लगाने के लिए वायुसेना और सेना की सभी एजेंसियों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इसके बाद सर्च अभियान में और तेजी लाने के लिए नौसेना के सर्विलांस एयरक्राफ्ट और इसरो के सैटेलाइट को भी शामिल किया गया। इसके बाद भी विमान का कोई सुराग नहीं मिला।
वायुसेना ने तेज किया अभियान, खराब मौसम से हुई दिक्कतविमान गायब होने के तीसरे दिन बुधवार को वायु सेना ने थल सेना और नौसेना के साथ इस अभियान को और तेज कर दिया, लेकिन इसके बाद भी विमान का सुराग नहीं मिल सका। इस दौरान वायु सेना ने कहा कि घने वनस्पती और खराब मौसम की वजह से सर्च अभियान में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, पुलिस और राज्य प्रशासन द्वारा समर्थित, ग्राउंड टीमों और हवाई सेंसरों द्वारा खोज जारी रहा। 

सर्च अभियान में विशेष हेलीकॉप्टर चीता भी हुआ शामिलगुरुवार विमान गायब होने के चौथे दिन सर्च अभियान में वायु सेना ने ने अपने विशेष हेलीकॉप्टर चीता को भी लगाया। यह हेलीकॉप्टर दिखने में काफी छोटा और तेज गतिमान वाला हेलीकॉप्टर है। सकरी से सकरी पहाड़ियों में भी ये हेलीकॉप्टर आसानी से उड़ान भरता है और पैदल और दुर्गम क्षेत्रों में भी आसानी से पहुंच जाता है। इससे पहले इस अभियान में सुखोई-30, सी-130 जे समेत अन्य संसाधन पहले से ही लगे हुए थे।   
लॉन्ग रेंज मैरीटाइम रीकानसन्स एयरक्राफ्ट सर्च अभियान में शामिलशुक्रवार विमान गायब होने के पांचवे दिन शुक्रवार को लापता विमान AN32 का पता लगाने के लिए आइएनएस राजली, अरकोणम, तमिलनाडु का लॉन्ग रेंज मैरीटाइम रीकानसन्स एयरक्राफ्ट पी8I को सर्च ऑपरेशन में शामिल किया गया। इस दौरान इंडियन एयरफोर्स एविएशन रिसर्च सेंटर के ग्लोबल 5000 सर्विलांस एयरक्राफ्ट और NTRO स्पाई सैटलाइट के साथ दूसरे चीजों का भी इस्तेमाल किया गया। 

बीएस धनोआ असम के जोरहाट एयरबेस पहुंचेलापता AN-32 विमान का 5 दिन बाद भी सुराग नहीं मिलने पर वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ असम के जोरहाट एयरबेस पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विमान में सवार एयरफोर्स कर्मियों के परिजनों के साथ बातचीत की। धनोआ ने इस दौरान उन्हें आश्वासन दिया कि विमान और कर्मियों का पता लगाने के लिए सभी संभव कदम उठाए जाएंगे।
मौसम बना बाधा नहीं चला सर्च ऑपरेशनरविवार को लापता AN-32 विमान का सर्च अभियान खराब मौसम की वजह से बाधित रहा। इस दौरान बताया गया कि हेलिकॉप्टर, यूएवी और सी-130J ने खोजी अभियान के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन बारिश के कारण वापस आ गए। हालांकि, बताया गया कि जमीनी स्तर पर अभी सर्च ऑपरेशन चली।

मौसम ठीक होने पर फिर शुरू हुआ सर्च ऑपरेशनसोमवार को मौसम ठीक होने पर वायुसेना ने फिर से हवाई सर्च ऑपरेशन शुरू किया। आठ दिन बीत जाने के बाद भी विमान का कोई सुराग नहीं मिला।
रूसी विमान है Antonov An-32    Antonov An-32  दो इंजन वाला टर्बोप्रोप मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है। ये एयरक्राफ्ट रूसी विमान एएन-26 का आधुनिक वर्जन है। इस विमान की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह किसी भी मौसम में उड़ान भरने में सझम है। इस एयरक्राफ्ट को इंदिरा गांधी की सरकार के समय रूस और भारत के बीच दोस्ताना संबंध और भारतीय वायुसेना की जरूरतों को देखते हुए मंगाया गया था। दुनिया के 10 देशों में 240 से अधिक AN-32 विमान संचालित किए जा रहे हैं। भारत में 105 विमान अभी सेवा में हैं।
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Posted By: Tanisk

Source: Jagran.com

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