बच्चों को जबरदस्ती रात में पिता के साथ रहने को नहीं किया जा सकता मजबूर

Publish Date:Wed, 12 Jun 2019 09:43 AM (IST)

माला दीक्षित, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने माता-पिता के बीच अलगाव के बाद बच्चों की कस्टडी को लेकर चल रही मुकदमेबाजी में पिसते बच्चों को लेकर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि बच्चों को जबरदस्ती रात मे पिता के साथ रहने को बाध्य नही किया जा सकता। कोर्ट ने बांबे हाईकोर्ट के आदेश में संशोधन करते हुए पांच और नौ वर्ष केे दो बच्चों को दिन में पिता के पास और रात में मां के पास रखने का आदेश दिया है।
न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और अजय रस्तोगी की अवकाशकालीन पीठ ने दोनों बच्चों से बात करने के बाद यह आदेश दिया है। बच्चों ने दिन में पिता के साथ रहने की तो हामी भरी थी, लेकिन उन्होंने रात में मां के पास रहने की बात कही। छोटा बेटा बार-बार यही कहता रहा कि वह रात में अपनी मां का हाथ पकड़ कर सोता है और वह मां के बगैर नहीं सो सकता। बड़ा बेटा भी रात में मां के ही पास रहना चाहता था। कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि दोनों बच्चों का एक दूसरे से बहुत जुड़ाव है।
इस मामले में माता-पिता के बीच अलगाव हो चुका है और दोनों के बीच बच्चों की कस्टडी (संरक्षक) के लिए मुकदमा चल रहा है। कोर्ट ने गर्मी की छुट्टियों में बच्चों की कस्टडी पिता को दे दी थी, जिसके खिलाफ मां सुप्रीम कोर्ट आई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि छोटे बच्चों की कस्टडी के मामले में बहुत ही संवेदनशीलता से विचार किया जाना चाहिए। बच्चे माता-पिता के बीच अदालत में कस्टडी को लेकर चल रही लड़ाई के बंधक नहीं बनने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि छोटा बच्चा जिसके पास रह रहा है उससे उसे जबरदस्ती अलग करने से बच्चे की मानसिकता पर पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि बच्चे को दोनों पैरन्ट्स के साथ रहने का अधिकार है और माता-पिता को भी बच्चों से मिलने का अधिकार है, लेकिन इसमें जहां तक संभव हो बच्चों की इच्छा को महत्व दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि उसने मामले की सुनवाई के दौरान बच्चों से बात की जिसमें बच्चे दिन का समय पिता के साथ बिताने को राजी थे, लेकिन रात में वे मा के साथ रहने की मांग कर रहे थे। छोटा बेटा बार बार कहे जा रहा था कि वह रात में मं का हाथ पकड़ कर सोता है। उसे मां के बगैर नींद नहीं आती। बड़ा बेटा भी रात में मां के साथ ही रहना चाहता है। दोनों भाई एक दूसरे से बहुत जुड़ाव रखते हैं। कोर्ट ने कहा कि बच्चों की भावनाओँ का ख्याल रखते हुए उन्हें यह ठीक नहीं लगता कि बच्चों को जबरदस्ती रात में पिता के साथ रहने को बाध्य किया जाए। कोर्ट ने कहा कि छुट्टियों भर बच्चे दिन में पिता के साथ रहने को तैयार है। हो सकता है कि समय बीतने के साथ बच्चे रात मे भी पिता के साथ रहने को तैयार हो जाए, लेकिन अभी वे तैयार नहीं हैं।
कोर्ट ने आदेश दिया कि गर्मी की छुट्टियों भर बच्चे सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक पिता के साथ रहेगे और रात में नौ बजे बच्चे वापस मां के पास पहुंचा दिये जाएगे। हालांकि यह अभी अंतरिम आदेश है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के अादेश के मुताबिक परिवार अदालती मामले की सुनवाई जारी रख सकती है और पक्षकार आगे के आदेश के लिए उससे मांग कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि भविष्य में बच्चों को रात में पास रखने की मांग भी की जा सकती है, लेकिन बच्चों की इच्छा के मुताबिक ऐसा होगा। कोर्ट ने कहा कि उनका आदेश अतरिम है और उसका परिवार अदालत की सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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Posted By: Manish Pandey

Source: Jagran.com

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