कठुआ केस में पूर्व जांच अधिकारी का खुलासा, जनवरी की ठंड में भी रेपिस्ट सांजी राम को आ रहा था पसीना

सांझी राम के चेहरे से टपक रहा था पसीना पठानकोट की एक सेशन कोर्ट ने कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप और हत्या के केस में सांझी राम और दो अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कठुआ केस की जांच 27 जनवरी 2018 को क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी। केस की जांच जल्ला कर रहे थे, वे करीब तीन महीने पहले ही रिटायर हुए हैं। वे कहते हैं, ‘घटनास्थल पर जांच करने के बाद, हम सांझी राम (मामले के मुख्य आरोपियों में से एक) के घर पहुंचे गए। मैंने और मेरी टीम ने गिरफ्तार किए गए नाबालिग भतीजे सहित परिवार के सदस्यों के बारे में पूछताछ शुरू कर दी, मैंने उसके बेटे विशाल के बारे में पूछा। इसपर सांझी राम ने घबराते हुए कहा कि बेटा मेरठ में पढ़ रहा है, मैं जाकर कॉल डिटेल चेक कर सकता हूं।’ ये भी पढ़ें: ‘हमारे सर पर मां दुर्गा का हाथ था, इसलिए मंदिर में रेप करने वालों को सलाखों तक पहुंचाया’ पूर्व अधिकारी को तब ही सांझी राम पर शक हुआ था जल्ला कहते हैं, ‘इसके बाद दो वजहों से उनको शक हुआ, पहला कि वह विशाल के कॉल रिकॉर्ड चेक करने को क्यों कह रहा था, दूसरा कि जनवरी की ठंडी सुबह में उसके चेहरे से पसीना टपक रहा था। कठुआ रेप और मर्डर केस में पठानकोट की विशेष अदालत ने सांझी राम, प्रवेश कुमार और दीपक खजुरिया को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पूर्व अधिकारी को विशाल के बरी होने का अफसोस इसके अलावा हेड कॉन्स्टेबल तिलकराज, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता और स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) सुरेंद्र वर्मा को 5-5 साल की कैद और 50-50 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई जबकि सांझी राम के बेटे विशाल को बरी कर दिया गया। जल्ला को इस बात का अफसोस है कि विशाल को संदेह का लाभ मिला और इसी कारण उसे बरी कर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘मैं केवल ये उम्मीद कर सकता हूं कि बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की जाए।’ केस की जांच को लेकर कोई राजनीतिक दबाव नहीं था- पूर्व अधिकारी जल्ला कहते हैं कि सांझी राम ने अपने बेटे को बचाने का हर संभव प्रयास किया। इसके पहले, आईजी (अपराध) ए मुज्तबा ने सोमवार को कहा था कि वे विशाल को बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील दायर करेंगे। पूर्व अधिकारी ने कहा इस केस को लेकर पीडीपी और बीजेपी के बीच तनाव देखने को मिला था लेकिन उन्हें किसी भी बीजेपी नेता का फोन नहीं आया। जल्ला ने कहा ‘मेरे या मेरी टीम पर किसी तरह का कोई राजनीतिक दबाव नहीं था और हम पूरी लगन और ईमानदारी के साथ अपना काम कर रहे थे।’ बता दें जल्ला पुलिस अधिकारियों के उस पहले बैच का हिस्सा थे जिन्हें 1990 के दशक की शुरुआत में गठित आतंकवाद-विरोधी बल के विशेष ग्रुप में शामिल किया गया था। वे 31 मार्च को एसएसपी (क्राइम) के पद से रिटायर हुए।
Source: OneIndia Hindi

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