जागरण जोश की शिक्षा संस्‍थानों की रैंकिंग से लाखों छात्र लाभान्वित होंगे: उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू

Publish Date:Wed, 27 Mar 2019 06:58 PM (IST)

नई दिल्ली, जेएनएम। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने Jagranjosh.com के ‘रैंक वन एजुकेशन फोरम’ को संबोधित करते हुए शिक्षा, समाज और संस्‍कृति के स्‍वरूप पर विस्‍तार से अपने विचार रखे। इन मामलों में जागरण के योगदान की उन्‍होंने सराहना भी की। Jagranjosh.com द्वारा देश के इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट इंस्‍टीट्यूट्स की तीसरी वार्षिक रैंकिंग जारी करते हुए नायडू ने इन क्षेत्रों में अव्‍वल रहने वाले संस्‍थानों को सम्‍मानित किया। उन्‍होंने कहा कि जागरण जोश की इस रैंकिंग से 12वीं की परीक्षा दे रहे लाखों छात्रों को उच्‍च शिक्षा के लिए उपयुक्‍त इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज की तलाश में मदद मिलेगी।
व्‍यावहारिक शिक्षा पर बलवैज्ञानिक और व्‍यावहारिक शिक्षा की जरूरत पर बल देते हुए नायडू ने कहा कि देश की तरक्‍की के लिए उच्‍च शिक्षा की गुणवत्‍ता को सुधारना जरूरी है। इसके लिए छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत तमाम तरह की आधुनिक टेक्‍नोलॉजी की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। उन्‍हें थ्‍योरी पढ़ाने के साथ ही संबंधित इंडस्‍ट्री में काम करके सीखने के मौके दिए जाने चाहिए। 

 योग को धार्मिक चश्‍मे से नहीं देखेंउपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भले ही हम उदारीकरण, निजीकरण और वैश्‍वीकरण (एलपीजी वर्ल्‍ड) से भरी दुनिया में रह रहे हैं, लेकिन व्‍यक्ति और समाज के सर्वांगीण विकास के लिए योग और समुचित शिक्षा आज अधिक जरूरी है। उन्‍होंने बताया कि किस तरह दुनियाभर में योग की लोकप्रियता बढ़ रही है, ऐसे में उसे किसी राजनीतिक या धार्मिक चश्‍मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

कॉलेजों में अच्‍छे शिक्षकों की भारी कमीनायडू ने कहा कि हमें युवाओं की उम्‍मीदों और आकांक्षाओं का सम्‍मान करना चाहिए। लेकिन अफसोस कि इन युवाओं को ज्ञान और ट्रेनिंग देने वाले हमारे उच्‍च शैक्षिक संस्‍थानों और विश्‍वविद्यालयों में अच्‍छे शिक्षकों की भारी कमी है। इसे देखते हुए उन्‍होंने इंडस्‍ट्री और प्रोफेशनल्‍स से युवाओं के साथ अपनी जानकारी साझा करने की अपील की। उन्‍होंने शैक्षिक और पेशेवर तरक्‍की के लिए गुरु के योगदान को महत्‍वपूर्ण बताते हुए कहा कि गूगल कितना भी बलशाली हो जाए, लेकिन गुरु उससे काफी अधिक अहम है।
पंचतत्‍व और वसुधैव कुटुंबकमइस अवसर पर उपराष्‍ट्रपति ने छात्रों और शैक्षिक संस्‍थानों को पंचतत्‍व की भी शिक्षा दी। उनके अनुसार माता-पिता, महिला, जन्‍मस्‍थल, मातृभाषा और गुरु जैसे पंचतत्‍व को उचित सम्‍मान देकर ही युवा अपना अपेक्षित लक्ष्‍य हासिल कर सकते हैं। नायडू ने इस अवसर पर शेयर और केयर का भी महत्‍व बताया। उनके अनुसार, ज्ञान को शेयर करने से ही उसका लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिलता है। इसी तरह पंचतत्‍व के केयर से आपको आंतरिक ताकत और उपयुक्‍त जगह मिलती है। इस क्रम में उन्‍होंने वसुधैव कुटुंबकम का भी जिक्र किया।

 अंग्रेजी से अधिक अहम है मातृभाषाऑनलाइन/डिजिटल के महत्‍व को रेखांकित करते हुए नायडू ने कहा कि भविष्‍य इसी का है। आगे हमारी तरक्‍की इसी पर निर्भर करेगी, ऐसे में डिजिटल क्रांति की रफ्तार को बढ़ाना होगा। मातृभाषा को उन्‍होंने आंखें और विदेशी भाषा को चश्‍मे की संज्ञा दी। उनके अनुसार, अंग्रेजी या कोई अन्‍य विदेशी भाषा सीखनी चाहिए, लेकिन अपनी मातृभाषा के प्रति अनुराग कम नहीं होना चाहिए।

जीडीपी ग्रोथ रेट में चीन से आगे हैं हमउपराष्‍ट्रपति ने कहा कि हमें गर्व है कि चीन जैसी बड़ी इकोनॉमी के साथ ही बाकी दुनिया के विकासशील मुल्‍कों की जीडीपी ग्रोथ रेट जहां कम रही है, वहीं आज भी हम सात फीसदी से भी ऊंची दर पर हमारी इकोनॉमी आगे बढ़ रही है।
रैंकिंग में महीनों लगे हैं: सीईओ भरत गुप्‍ताइससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जागरण न्‍यू मीडिया के सीईओ भरत गुप्‍ता ने रैंक वन एजुकेशन फोरम का महत्‍व बताया। उन्‍होंने कहा कि इस रैंकिंग से लाखों छात्रों को उच्‍च शिक्षा के मामले में बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी। इस रैंकिंग के लिए जरूरी सर्वे में कई महीने लगे हैं और हजारों छात्रों, शिक्षकों और इंडस्‍ट्री के टॉप लोगों से इस संबंध में जानकारियां ली गई हैं। भरत गुप्ता ने जागरण न्यू मीडिया के विज़न और मिशन पर भी प्रकाश डाला, जो डिजिटल स्पेस में अपने यूजर्स को शानदार सामग्री प्रदान करने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि जेएनएम अपने 9 डिजिटल पोर्टल्स के माध्यम से वर्तमान में 6 करोड़ से अधिक यूजर्स को विभिन्न प्रकार की जानकारियां दे रहा है।

इस अवसर पर जागरण प्रकाशन के सीईओ और एडिटर इन चीफ संजय गुप्‍ता के साथ कई गणमान्‍य लोग मौजूद थे। Jagranjosh.com का रैंक वन एजुकेशन फोरम का शुभारंभ राष्ट्रीय गान के साथ शुरू हुआ और उसके बाद दीप प्रज्ज्वलन समारोह हुआ। फोरम में प्रख्यात शिक्षाविदों ने पैनल चर्चा की, जिन्होंने भारत की शिक्षा प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार रखे और उसके व्यावहारिक समाधान भी सुझाए।

Posted By: Tilak Raj

Source: Jagran.com

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