चुनाव से पहले नौकरी जाने के खतरे से बच जाएंगे 12 लाख शिक्षक

Publish Date:Sat, 16 Mar 2019 01:17 AM (IST)

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश भर के स्कूलों में पढ़ा रहे करीब 12 लाख अप्रशिक्षित शिक्षकों की नौकरी फिलहाल बच गई है। ऐसे सभी शिक्षकों का प्रशिक्षित करने का काम 31 मार्च को पूरा हो रहा है। इन शिक्षकों में सबसे ज्यादा शिक्षक उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के है। इसके साथ ही स्कूली शिक्षा के माथे से वह कलंक भी धुल जाएगा, जिसके तहत स्कूलों में अब तक प्रशिक्षित शिक्षकों के पढ़ाने का ठीकरा फोड़ा जाता था। हालांकि यह काम वर्ष 2014-15 में ही हो जाना था, लेकिन हो नहीं पाया।
स्कूलों में पढ़ा रहे अप्रशिक्षित शिक्षकों के प्रशिक्षण इसलिए भी जरुरी था, क्योंकि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) नियमों के तहत स्कूलों में कोई भी अप्रशिक्षित शिक्षक नहीं पढ़ा सकता है। यह नियम सरकारी और निजी स्कूलों दोनों के लिए ही है। सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार के सामने यह एक बड़ी चुनौती थी। बावजूद इसके ऐसे सभी शिक्षकों की नौकरी बचाने के लिए सरकार ने रास्ता निकाला।
एक तय समय में सभी को प्रशिक्षित करने की एक ठोस योजना बनाई। इसके साथ ही पहले से तय की गई समय-सीमा को 31 मार्च 2019 तक विस्तार दिया। बाद में सभी को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के जरिए प्रशिक्षण देने की मुहिम शुरू की। देश भर में एक साथ ऐसे सभी शिक्षकों का प्रशिक्षण  देने का काम शुरू किया गया। जो अब चुनाव से ठीक पहले पूरा होने जा रहा है।

एनआईओएस के आंकड़ों के मुताबिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे इन 12 लाख शिक्षकों में करीब 2.69 लाख शिक्षक अकेले बिहार के है। जबकि उत्तर प्रदेश के 1.61 लाख, पश्चिम बंगाल के 1.62 लाख और मध्य प्रदेश के 1.57 लाख शिक्षक है। खासबात यह है कि इन शिक्षकों में सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ा रहे दोनों तरह के शिक्षक शामिल है। इन सभी को एक साथ प्रशिक्षण देने के लिए व्यापक इंतजाम भी किए गए थे। वहीं इसे लेकर देश भर में करीब 3186 परीक्षा केंद्र भी खोले गए थे।
वहीं इन सभी को पाठ्य सामग्री आनलाइन और कांफ्रेंस क्लास के जरिए उपलब्ध कराई गई। एनआईओएस से जुड़े अधिकारियों की मानें तो आरटीई नियमों के तहत यदि इन्हें प्रशिक्षण नहीं दिया जाता, तो इन सभी को नौकरी से हाथ धोना पड़ जाता। अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का यह यह नीति यूपीए सरकार के कार्यकाल में आरटीई के तहत वर्ष 2009-2010 में तय की गई थी। इसके तहत अगले पांच सालों में यानि 2014-15 तक सभी प्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाना था।

Posted By: Arun Kumar Singh

Source: Jagran.com

Related posts

Leave a Comment