सैकड़ों की भीड़ में कभी देखी है ऐसी लड्डू मार होली

आमतौर पर लोग गुलाल और रंगों से होली खेलते हैं. मथुरा और वृंदावन के साथ ही कुछ जगहों पर फूलों की होली भी खेली जाती है. लेकिन मथुरा के बरसाना की ही एक और विश्व प्रसिद्ध होली है लड्डू मार होली. इस होली में पानी के भरे गुब्बारे नहीं लड्डू फेंक-फेंककर मारे जाते हैं.मज़े की बात ये है कि इन्हीं लड्डूओं को होली खेलने वाले लूट-लूटकर खाते भी हैं. बरसाना की लठ्मार होली की तरह से ही लड्डू मार होली खेलने के लिए भी बड़ी दूर-दूर से लोग आते हैं. बरसाना के स्थानीय निवासियों का दावा है कि लड्डू मार होली में कुंटलों के हिसाब से लड्डू मारे जाते हैं. शुक्रवार को बरसाना में लट्ठमार होली खेली जाएगी.मथुरा और बरसाना में भगवान श्री कृष्ण और राधा के प्रेम की प्रतीक होली 8 दिन पहले से शुरु हो जाती है.  होली के रंग में रंगने के लिए दूरदराज से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बरसाना पहुंचते हैं और घंटों तक लड्डू मार होली खेलते हैं. दोपहर होते ही भक्तों का मेला श्रीजी मंदिर में जुड़ जाता है और इंतजार रहता है  मंदिर के कपाट खुलने का. कपाट खुलते ही मंदिर में लड्डू मार होली का उत्सव शुरू हो जाता है. भक्त श्री जी के दर्शन कर उन्हें गुलाल और लड्डू अर्पित करते हैं.नंदगांव से कृष्ण स्वरूप सखा सज-धज कर बरसाने फ़ाग मनाने आते हैं. मंदिर के सेवायत बूंदी के लड्डडूयो से उनका स्वागत करते हैं. चारों तरफ से लड्डूओं की बरसात होने लगती है. लड्डुओं को लूटने के लिए हजारों हाथ खड़े हो जाते हैं. और प्रसाद पाने के लिए ललायित रहते हैं. समूचा मंदिर प्रांगण राधा-कृष्ण के प्रेम में सराबोर हो जाता है. जिसके बाद राधा-कृष्ण के भजनों और होली के गीतों से मंदिर परिसर गूंजने लगता है. भक्त राधा-कृष्ण के प्रेम में सरोवर होकर नाचने लगते हैं.ये भी पढ़ें- मथुरा: देश भर में सिर्फ यहां फूलों से होली खेलती हैं विधवा महिलाएंअनूठी पहल: मथुरा के गिरिराज मंदिर में चढ़ने वाला दूध अब अनाथों और शहीदों के परिवार को जाएगाLoading… सुबह पहले बरसाना की राधा न्योता लेकर नंद भवन पहुचती है. जहाँ सखी रुपी राधा का स्वागत किया जाता है. श्रद्धालुओं ने बताया कि राधा-रानी के मंदिर में आकर हम धन्य हो जाते हैं. हम हर साल होली खेलने के लिए बरसाना आते हैं.

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Source: News18 News

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