व़कील के फली नरीमन का नाम लेने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

Publish Date:Tue, 05 Mar 2019 10:31 PM (IST)

 नई दिल्ली, प्रेट्र। न्यायाधीशों के बेटे और बेटियों को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा देने के संबंध में अपनी दलीलों के समर्थन में एक वकील द्वारा प्रसिद्ध विधिवेत्ता फली एस नरीमन का नाम घसीटे जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह की दलील अवमानना की कार्रवाई को आमंत्रित करने के समान है।
शीर्ष अदालत उस वक्त नाराज हो गई जब वकील ने इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस नरीमन के विचारों का उल्लेख करने का प्रयास किया। न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने अधिवक्ता मैथ्यूज जे नेदुमपारा से कहा, ‘आपने फली एस नरीमन का नाम क्यों लिया। क्या आप सोचते हैं कि आप बच जाएंगे। उनका इस मामले से क्या लेनादेना है। हम आपको चेतावनी दे रहे हैं कि हम आपके खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी करने जा रहे हैं।’ पीठ ने मौखिक रूप से कोर्ट मास्टर से कहा कि वकील ने जो भी दलीलें रखी हैं उसे रिकॉर्ड में रखें।
अधिवक्ता ने पीठ के गुस्से से यह कहकर बचने का प्रयास किया कि उन्होंने किसी वरिष्ठ अधिवक्ता का नाम नहीं लिया। इस पर नाराज न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा, ‘समूची अदालत ने सुना कि आपने उनका नाम लिया।’ इस पर अदालत कक्ष में मौजूद कुछ वकीलों ने भी इस पर सहमति जताई। अपना फैसला सुरक्षित रखने से पहले पीठ ने नेदुमपारा को चेतावनी दी कि वह कानून के पेशे केबारे में दलील रखते वक्त किसी का नाम नहीं लें। पीठ ने कहा, ‘आप सोचते हैं कि आप कुछ भी बोलकर बच जाएंगे।’ बता दें कि न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन जाने-माने विधिवेत्ता फली एस नरीमन के पुत्र हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा देने का प्रावधान समानता के अधिकार का उल्लंघननेदुमपारा वकीलों के एक संगठन ‘नेशनल लॉयर्स कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल ट्रांसपेरेंसी एंड रीफा‌र्म्स’ की तरफ से दलील रख रहे थे। वकीलों के संगठन ने अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16 (2) को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया है कि दो श्रेणी के अधिवक्ता होने चाहिए।
नेदुमपारा ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा देने का प्रावधान समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है क्योंकि इसमें न्यायाधीशों के बेटों को प्राथमिकता दी जा रही है। नेदुमपारा ने कहा कि 30 या 35 साल की वकालत कर चुके और 60 साल की आयु पार कर चुके वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया जाना चाहिए। इस दलील का पीठ पर असर नहीं पड़ा। पीठ ने कहा, ‘तो आप सोचते हैं कि इसे इनाम के रूप में दिया जाना चाहिए।’

Posted By: Arun Kumar Singh

Source: Jagran.com

Related posts

Leave a Comment