सिनेमा में 50 साल: अदाकारी से जग जीतने वाले अमिताभ बच्चन ‘राजनीति’ से कैसे हार गए?

50 Years of Amitabh Bachchan: अमिताभ बच्चन, हिंदी सिनेमा का वो सितारा जो पिछले पचास सालों से अपने अभिनय के दम पर इस इंडस्ट्री में अपनी चमक कायम रखने में कामयाब रहा है. अमिताभ के फैंस दुनियाभर में हैं. उनके लिए लोगों की दीवानगी देखनी हो तो मुंबई में उनके घर ‘जलसा’ के बाहर का नज़ारा देख लें, वहां का दृश्य ही सब कुछ बयान करने के लिए काफी है. अमिताभ ने अपने करियर में हर वो चीज़ हासिल की, जिसकी उन्होंने शायद कभी तमन्ना की होगी. एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में उन्होंने छोटे और बड़े दोनों परदे पर अपना परचम लहराया, लेकिन राजनीति में कामयाबी हासिल करने के बाद भी वो इससे दूर चले गए. आखिर ऐसा क्या हुआ कि बिग बी ने तीन साल में ही राजनीति से अपना रिश्ता तोड़ लिया? आइए जानते हैं-साल 1984 में अमिताभ बच्चन इलाहाबाद से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़े थे. चुनाव में उन्होंने उस वक्त के लोकप्रिय नेता हेमवती नंदन बहुगुणा को मात दी, जिन्हें हराना लगभग असंभव माना जाता था. अमिताभ की ये जीत कोई आम जीत नहीं थी. उन्होंने बहुगुणा जैसे कद्दावर नेता को रिकॉर्ड 1 लाख 87 हज़ार 795 वोटों के भारी अंतर से हराया था. चुनाव में अमिताभ बच्चन को जहां, 2 लाख 97 हज़ार 461 वोट मिले थे, वहीं बहुगुणा को महज़ 1 लाख 9 हज़ार 795 वोट ही मिले थे. इस भारी भरकम जीत के बाद भी अमिताभ जैसे स्टार का पोलिटिकल करियर तीन साल ही चल पाया और उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
लोकसभा चुनाव लड़ने से पहले बुलंदी पर थे बिग बी अमिताभ बच्चन ने फिल्मों से ब्रेक लेकर राजनीति में उतरने का फैसला किया था, जब उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बनाया था उस वक्त वो हिंदी सिनेमा में चोटी के अभिनेताओं में शुमार किए जाते थे. 1984 के चुनाव से पहले उन्होंने ‘शराबी’, ‘कुली’, ‘सत्ते पे सत्ता’, ‘कालिया’, ‘याराना’, ‘सिलसिला’, ‘लावारिस’, ‘शान’, ‘दोस्ताना’, ‘काला पत्थर’ और ‘मिस्टर नटवरलाल’ जैसी कई हिट फिल्में दी थीं. चुनाव के बाद भी उनकी कुछ फिल्में आईं लेकिन वो कुछ खास नहीं चलीं. हालांकि राजनीति से दूर जाने के बाद उन्होंने सिनेमा की दुनिया में एक बार फिर दमदार वापसी की और साल 1988 में ‘शहंशाह’ जैसी सुपरहिट फिल्म दी.क्या बोफोर्स कांड बना बिग बी के इस्तीफे की वजह?राजनीति में दमदार एंट्री लेने वाले अमिताभ ने इससे नाता क्यों तोड़ा इसको लेकर कई तरह के कयास लगाए जाते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि बिग बी ने बोफोर्स घोटाले में नाम आने की वजह से राजनीति छोड़ी. हालांकि अमिताभ बच्चन ने पोलिटिक्स छोड़ने को लेकर कई बार खुलकर बात की है.जब अमिताभ बच्चन को बोफोर्स घोटाले में क्लीनचिट मिली थी तब उन्होंने एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहा था, “नहीं ये गलत बात है. बोफोर्स की वजह से मैंने अपना इस्तीफा नहीं दिया था. मुझे राजनीति आती नहीं थी और न आज आती है. मैंने उस ज़माने में इसीलिए छोड़ा था क्योंकि मुझे राजनीति आती नहीं थी. वो तो इत्तेफाक से उसके कुछ दिनों बाद ये बोफोर्स की बात निकली थी. तो लोगों ने ऐसा अनुमान लगाया कि शायद बोफोर्स के मामले से प्रेरित होकर मैंने इस्तीफा दिया, लेकिन ऐसा कुछ नहीं था मैंने बहुत पहले ही पार्टी को अपना इस्तीफा दे दिया था.”आखिर क्या थी इस्तीफे की वजह ?कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन के पिता और मशहूर कवि डॉ हरिवंश राय बच्चन और गांधी परिवार के रिश्ते बेहद करीबी थे. शायद यही वजह थी कि अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी दोनों बेहद अच्छे दोस्त थे. राजीव ही अमिताभ को राजनीति में लेकर आए थे. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 के लोकसभा चुनाव में राजीव ने अमिताभ को एक राजनेता के तौर पर जनता के सामने पेश होने को कहा. अमिताभ ने भी अपने दोस्त के बुरे वक्त में उनका साथ देने का फैसला किया और चुनावी मैदान में उतर गए. लेकिन कुछ सालों बाद ही अमिताभ ने पार्टी को अपना इस्तीफा सौंप दिया. अमिताभ बच्चन ने एक इंटरव्य में इतने कम वक्त में राजनीति छोड़ने पर कहा था, “मुझे राजनीति आती नहीं. एक भावुक स्तर पर मैं चुनाव लड़ गया और जीत भी गया, लेकिन उसके बाद मैंने देखा कि मैं क्वालिफाइड नहीं हूं. इससे पहले कि लोगों को मैं अपने क्वालिफिकेशन से निराश करूं, मैंने सोचा के इसको मुझे नहीं करना चाहिए. तो हाथ जोड़कर मैंने वहां अपना त्यागपत्र दे दिया.”जया ने कहा था- राजनीति में आकर खुश नहीं थे अमिताभ एक दफा इंडियन एक्सप्रेस के कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन की पत्नी और सांसद जया बच्चन ने भी उनके पोलिटिक्स छोड़ने की वजह पर बात की थी. उन्होंने कहा था कि राजनीति में शामिल होने के कुछ दिनों बाद ही अमिताभ बच्चन खुश नहीं थे और वो राजनीति छोड़ना चाहते थे. उन्होंने बताया कि अमिताभ ने उनसे कहा था, “मैं ये नहीं कर सकता, ये मेरा स्टाइल नहीं है. मैं ऐसे नहीं जी सकता, मैं ऐसे नहीं बोल सकता.” जया ने बताया कि वो कंफर्टेबल नहीं थे. उन्होंने कहा कि अमिताभ बेहद निजी किस्म के इंसान हैं और जब आप दो ऐसे कामों को करें जो पब्लिक में हो -सिनेमा और राजनीति तो आपकी ज़िंदगी एक्सपोज़ हो जाती है.यह भी पढ़ेंसिनेमा में 50 साल: फिल्मफेयर के टैलेंट शो में अमिताभ हुए थे रिजेक्ट, इनकी कोशिशों से मिली थी पहली फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’सिनेमा में 50 साल: ‘डॉन’ से लेकर ‘शराबी और ‘दीवार’ तक, इन फिल्मों में बिग बी ने कहे ज़िंदगी के यादगार डायलॉगसिनेमा में 50 साल: खिताबों के शहंशाह हैं अमिताभ बच्चन, जीत चुके हैं 14 फिल्मफेयर और चार नेशनल अवॉर्ड
Source: ABP News

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