जानिए 16वीं लोकसभा पिछले पांच सालों में सर्वश्रेष्ठ होने के साथ बेकार क्यों रही ?

India oi-Hemraj |

Updated: Thursday, February 14, 2019, 15:39 [IST]
नई दिल्ली: 16वीं लोकसभा का अंतिम संत्र बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के समापन सत्र के दौरान लोकसभा को संबोधित किया। पीएम मोदी ने बुधवार को कहा कि इस लोकसभा में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि इस लोकसभा ने देश हित में कई महत्वपूर्ण बिल पारित किए। इस बार बजट सत्र 13 दिन चला। राज्यसभा में बजट सत्र लगभग हंगामे की भेंट चढ़ गया। अगर 16वीं लोकसभा की बात की जाए तो कई नए कीर्तिमान बने। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के बाद सभी पार्टियों ने मोदी सरकार के आखिरी और 6वें बजट को सहमति से पास कर दिया। 16वीं लोकसभा का लेखा-जोखा 16वीं लोकसभा में कुल 1,615 घंटे काम हुआ, जो इस कार्यकाल की दूसरी सबसे कम काम करने वाली लोकसभा है। हालांकि ये पिछली लोकसभा से 20 फीसदी ज्यादा था। लेकिन अगर तक देश की सभी लोकसभा से इसकी तुलना की जाए तो ये 40 फीसदी कम है। अब तक की लोकसभा में काम का कुल औसत 2689 घंटे हैं। जहां अब तक की सभी लोकसभा में 468 औसत दिन काम हुआ। वहीं 16 वीं लोकसभा की कार्यवाही कुल 331 दिन चली। जो कि सभी लोकसभाओं के औसत से 137 दिन कम है। लोकसभा का 16 फीसदी समय हंगामे की वजह से खराब हुआ। लेकिन ये राज्यसभा से कम है, जहां 36 फीसदी कम काम हुआ। वहीं 15वीं लोकसभा में 37 और राज्यसभा में 14 फीसदी समय हंगामे की भेंट चढ़ा। 16वीं लोकसभा में विधायिका का समय बढ़ा 16वीं लोकसभा में कुल समय का 32 फीसदी समय कानून बनाने की प्रक्रिया में बीता। यह औसत 25 फीसदी से ज्यादा है और दूसरा सर्वोच्च रिकॉर्ड है। लोकसभा में 13 फीसदी समय प्रश्नकाल में बीता। इस बार 27 अविश्वास प्रस्ताव सदन में रखे गए. जिन पर चर्चा में 11 घंटे और 46 मिनट बीते। पिछली लोकसभा से ज्यादा बिल पास इस लोकसभा में कुल 133 बिल पास हुए जो पिछली लोकसभा से 15फीसदी अधिक है। लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों के 46बिल खत्म हो गए इसमें सिटिजन बिल और तीन तलाक बिल भी शामिल हैं। इस बार पार्लियामेंट कमेटी को भेजे गए बिलों की संख्या पिछली लोकसभा की तुलना में 25 फीसदी कम रही। जबकि पिछली लोकसभाओं में 71 और 60 फीसदी बिलपार्लियामेंट कमेटी को भेजे गए थे। 16वीं लोकसभा ने वित्त से संबंधित 26 फीसदी बिल पास किए गए इसमें वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी)और भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक भी शामिल है।

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Source: OneIndia Hindi

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