किसानों को सालाना 6000 रुपये देने जा रही मोदी सरकार ने कर्जमाफी पर क्या कहा?

केंद्र सरकार ने कृषि कर्जमाफी से राज्यों की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर कोई आकलन नहीं किया है. जबकि कुछ लोग इसे लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं. केंद्र सरकार किसानों का कर्ज माफ करने की बजाय सीधे उनके बैंक खाते में सहायता देना चाहती है जबकि ज्यादातर गैर बीजेपी शासित राज्यों ने किसानों का कर्ज माफ करने का दांव चला है. इस बीच सांसद वीरेंद्र कश्यप और अर्जुन लाल मीना ने संसद में सरकार से सवाल पूछा कि ऋण माफी से राज्यों की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है? (ये भी पढ़ें: इन किसानों को नहीं मिलेगी 6000 रुपये की सहायता, कहीं आप तो नहीं हैं इनमें?)इसके जवाब में कृषि व किसान कल्याण राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा, “कृषि राज्य का विषय होने के नाते केंद्र सरकार ने ऐसे राज्यों, जिन्होंने अपनी खुद की कर्जमाफी योजनाओं की घोषणा की है, की अर्थव्यवस्था पर कर्जमाफी के प्रभाव के संबंध में कोई आकलन नहीं किया है.”       कर्जमाफी की जगह सीधे किसानों को फायदा देने का दांव!यूपीए सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर 2008 में कर्जमाफी की थी. राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के मुताबिक इस योजना के तहत देश में 3.73 करोड़ किसानों को 52,516 करोड़ रुपये की ऋण माफी की गई थी. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस ने कर्जमाफी का दांव चलकर किसानों को अपनी तरफ करके सत्ता हासिल की. अब इसकी काट में केंद्र सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत दो हेक्टेयर तक की खेती वाले कृषकों को सालाना 6000 रुपये की सहायता देने जा रही है.ये भी पढ़ें: इतनी बढ़ गई किसानों की आय, पीएम मोदी के इस दांव से हो जाएगी डबल!संसद में ही कृषि कर्जमाफी पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया है, “सरकार ने किसान ऋण माफी के लिए कोई समिति गठित नहीं की है. सरकार ऋण माफी के पक्ष में नहीं है. क्योंकि इससे ऋण और वसूली वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. ऐसा किए जाने से व्यवस्था संबंधी गंभीर परिणाम होते हैं.” हालांकि बीजेपी ने 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कर्जमाफी का दांव चला और उसे इसका बड़ा फायदा मिला था. इसी तरह पार्टी ने महाराष्ट्र में भी कर्जमाफ किया.        सरकार की कोशिश, असली किसानों को मिले फायदा (file photo)Loading… वैसे कृषि मंत्री की तरह ही हरित क्रांति के जनक एमएस स्‍वामीनाथन कर्ज माफी को अर्थव्‍यवस्‍था के लिए उपयुक्‍त नहीं मानते. उन्‍होंने राजनेताओं से अपील की है कि चुनावी फायदे के लिए वे इस तरह के कदम ना उठाएं. यही नहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है  “कृषि कर्जमाफी से राज्य और केंद्र की अर्थव्यवस्था पर निगेटिव असर होता है. किसान कर्जमाफी का सबसे बड़ा फायदा साठगांठ वालों और गरीबों की जगह अमीर किसानों को मिलता है.” तमिलनाडु, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में कर्जमाफी हुई है.इसे भी पढ़ें:वह किसान जिसे नहीं चाहिए कर्जमाफी का फायदा! खेती से बंपर मुनाफा चाहिए तो इन ‘कृषि क्रांतिकारी’ किसानों से लें टिप्स!देश के इतिहास में किसानों को पहली बार मिलेगा पद्मश्री, 2013 में उठी थी आवाजकिसानों को मोदी सरकार की घोषणा से ज्यादा पहले से ही दे रही हैं ये राज्य सरकारें
Source: News18 News

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