ऑडियो क्लिप में 50 करोड़ रुपये में बुक करने के दावे पर स्‍पीकर बोले- यह अपराध है

News18.com

Updated: February 12, 2019, 5:04 PM IST कर्नाटक में सियासी उठापलट बढ़ती जा रही है. बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा का एक कथित ऑडियो टेप सामने आने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है. अभी कुछ दिन पहले ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने एक ऑडियो टेप जारी करके येदियुरप्पा पर संगीन आरोप लगाए थे. इस टेप को लेकर अब विधानसभाध्यक्ष ने जांच के आदेश भी दे दिए हैं. राज्य सरकार मामले की एसआईटी जांच कराने जा रही है.वहीं बीएस येदियुरप्पा ने एसआईटी जांच के फैसले का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि यह एजेंसी मुख्यमंत्री के तहत काम करती है. इसलिए इसका जांच करना उचित नहीं है. जबकि स्पीकर रमेश कुमार ने कहा कि इस विवाद में अपना नाम घसीटे जाने का वह सख्ती से विरोध करते हैं. सीएम कुमारस्वामी ने कुछ दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक ऑडियो क्लिप जारी की थी. येदियुरप्पा ने कथित तौर पर विधायक नागना गौड़ा कांदकुर के पुत्र शरना गौड़ा से बातचीत के दौरान विधानसभाध्यक्ष केआर रमेश कुमार के नाम का भी जिक्र किया.इस मामले पर न्यूज18 से बात करते हुए विधानसभाध्यक्ष रमेश कुमार कहते हैं कि वह उनपर लगाए गए ऐसे आरोपों पर सख्ती से कदम उठाएंगे. यह विवाद, आपराधिक जांच का मामला है. हम आपको बताते हैं विधानसभाध्यक्ष से बातचीत के प्रमुख अंश:प्रश्न: गंभीर आरोप हैं कि अध्यक्ष को 50 करोड़ रुपये में ‘बुक’ किया गया है…उत्तर: जो लोग ऐसे रास्ते पर चलना चाहते हैं वहीं इन बातों के बारे में सोचें.प्रश्न: क्या यह अध्यक्ष के खिलाफ विशेषाधिकार का हनन नहीं है?उत्तर: यह ऐसा ही है. केवल व्यक्तिगत विशेषाधिकार नहीं, बल्कि पूरे सदन का है. अगर कुछ लोग ऐसा कहते हैं, तो यह ठीक है…Loading… प्रश्न: यह मामला उलझा हुआ है?उत्तर: मेरे पास यह निष्कर्ष है कि विधायकों को इस्तीफा देने में शामिल लोगों में से एक व्यक्ति इसमें होना चाहिए. लेकिन मुझे ऐसा लग रहा है कि ऑडियो क्लिप की आवाज सदन के किसी सदस्य की ही है.प्रश्न: इसमें जो भी व्यक्ति शामिल है, वह पहले भी खरीद फरोख्त में शामिल रहा है?उत्तर: सौ प्रतिशत. ऑडियो की आवाज से ऐसा लगता है.प्रश्न: क्या आप बीजेपी की मांग पर न्यायिक जांच कराएंगे या विशेष जांच टीम का गठन करेंगे.?उत्तर: न्यायिक जांच का एक अलग आयाम है. यह एक आपराधिक कृत्य है. एक बार जांच होने के बाद फोरेंसिक टेस्ट से व्यक्ति का पता चलेगा. न्यायिक जांच इन चीजों से निपटने में सक्षम नहीं है. उनके पास दंडात्मक कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं है.प्रश्न: तो आपको लगता है कि यह आपराधिक जांच और प्रॉसिक्यूशन का मामला है?उत्तर: सौ प्रतिशत. केवल प्रॉसिक्यूशन ही नहीं. अगर इसमें सदन का कोई सदस्य है तो यह उससे भी गंभीर मामला है.ये भी पढ़ें: PM मोदी बोले- देश में कर्नाटक की तरह मजबूर सरकार चाहती है कांग्रेसये भी पढ़ें: येदियुरप्पा ने माना- ऑडियो क्लिप में है उनकी आवाज़, काट-छांट की साज़िश का लगाया आरोपएक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Source: News18 News

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