OPINION: सीबीआई को लेकर जेटली के बयान के हैं बड़े मायने

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के हालिया ब्लॉग के बाद देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है. सीबीआई पर राजनीतिक दबाव में काम करने और पिंजड़े का तोता होने के आरोप पहले भी लग चुके हैं. पिछले दिनों सीबीआई में जो कुछ हुआ किसी से छुपा नहीं है. इस जांच एजेंसी के सर्वोच्च पद पर बैठे दो अफसरों ने एक दूसरों पर जिस तरह से गंभीर आरोप लगाए, इसके बाद इस जांच एजेंसी की बची खुची प्रतिष्ठा भी खाक हो गई. हालात ऐसे हुए कि कई राज्यों में सीबीआई के गठन के समय दी गई अपनी सहमति वापस ले ली. ऐसे में केंद्र सरकार में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले मंत्री अरुण जेटली का सीबीआई पर इस तरह का आरोप इस जांच एजेंसी की विश्वसनीयता की ताबूत में आखिरी कील न साबित हो जाए.अरुण जेटली ने सीबीआई के जांच करने के तरिकों पर सवाल उठाते हुए साफ-साफ कहा कि जांच एजेंसी जांच में अपराध की तह तक पहुंचने की बजाय रोमांच तलाशने में लगी रहती है. जेटली केंद्रीय मंत्री होने के साथ-साथ वरिष्ठ वकील भी हैं. ऐसे में उनके बयान को सिर्फ राजनीति के आईने से नहीं देखना चहिए.ये भी पढ़ें- वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा-जांच करें, रोमांच न तलाशें सीबीआईजेटली का बयान के राजनितिक मायने भली ही कई हों, लेकिन अगर धरातल पर जाकर देखेंगे तो देश के चर्चित आरूषी मर्डर केस जैसे सैकड़ों मामले हैं, जिनमें सीबीआई की जांच अंजाम तक नहीं पहुंच पाई. जांच की मीडिया लीक की बात जो जेटली ने अपने बयान में कही है, वह भी सौ फीसदी सही है क्योंकि सीबीआई की जांच में शायद ही ऐसा कोई केस हो जो बिना की किसी मीडिया लीक के अंजाम तक पहुंचा हो.ये भी पढ़ें- लोकसभा चुनाव से पहले CBI के ताबड़तोड़ छापे के क्या हैं सियासी मायने?बात करें आंकड़ों की तो दूनिया भर में अपराधियों को सज़ा दिलाने के मामले में भारत सबसे निचले पायदान में खड़े देशों में एक है. दुनिया में अपराधियों को सज़ा दिलाने के मामले में चीन 99.9 फीसदी के साथ सबसे ऊपर है. हालांकि चीन के इस आंकड़े और कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े होते रहे हैं. जापान में भी करीब 99 फीसदी अपराधों में सज़ा मिल जाती है. इजराइल में भी करीब 93 फीसदी मामले अंजाम तक पहुंच जाते हैं. वहीं कनाडा में करीब 97 फीसदी मामलों में अपराधियों को सजा हो जाती है, तो अमेरिका और ब्रिटेन में अपराधियों को सजा देने का औसत करीब 85 और 80 फीसदी है. लेकिन भारत में अपराधियों को सजा मिलने का औसत करीब 46 फीसदी ही है.इसमें दोष सिर्फ सीबीआई का नहीं है. राज्य सरकारों की हालात तो सबसे खराब है. केरल अपराधियों को सज़ा दिलाने के मामले में सबसे ज्यादा 84 फीसदी है, जबकि बिहार सबसे नीचे सिर्फ 10 फीसदी है. बात करें सीबीआई की तो यहां कनविक्शन रेट 2014 में 65 फीसदी और 2015 में 69 के आस-पास रहा, हालंकि 2005 में यह आंकड़ा 73 फीसदी के आस-पास था.साफ है जेटली के बयान पर रजनीति तो होगी ही, क्योंकि वह नेता हैं. लेकिन अगर हम उनके इस बयान को देश के एक काबिल वकील के नजरिए से देखें तो इसमें ऐसा बहुत कुछ है, जिस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है. यहां एक बात तो शीसे की तरह साफ है कि दुनिया भर की जांच एजेंसियों के आंकड़ों को देखते हुए सीबीआई समेत देश की सभी जांच एजंसियों को अपना जांच के तरिकों में बहुत बड़े बदलाव की जरूरत है. (इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं.)एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Source: News18 News

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