उत्तराखंड के ब्लॉक प्रमुख का अनोखा मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

Publish Date:Sun, 27 Jan 2019 06:57 PM (IST)

माला दीक्षित, नई दिल्ली। उत्तराखंड के एक ब्लाक प्रमुख का अनोखा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। मामला यह है कि चंदन सिंह पंवार जहां से ब्लाक प्रमुख निर्वाचित हुए थे नए कानून में वह क्षेत्र म्यूनिसपल क्षेत्र में शामिल हो गया है जिसके चलते उनकी ब्लाक प्रमुख सदस्यता चली गई।
बैठे बिठाए ब्लाक प्रमुख सदस्यता गंवाने वाले पंवार राहत की गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फौरी राहत देते हुए उनकी ब्लाक प्रमुख सदस्यता समाप्त करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने पंवार की याचिका पर उत्तराखंड सरकार को नोटिस भी जारी किया।
यह आदेश पिछले सप्ताह न्यायमूर्ति एके सीकरी व एस अब्दुल नजीर की पीठ ने पंवार के वकील यूके उनियाल और डीके गर्ग की दलीलें सुनने के बाद जारी किया। कोर्ट ने उनकी याचिका पर उत्तराखंड सरकार, उत्तराखंड के पंचायत राज निदेशक और उत्तरकाशी के चीफ डेवलेपमेंट अफसर को नोटिस भी जारी किया।
इससे पहले वकील डीके गर्ग ने सदस्यता समाप्त करने के आदेश को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि चंदन सिंह को जिस कानून (यूपी पंचायत राज एक्ट 1947 और यूपी क्षेत्रीय पंचायत व जिला पंचायत एक्ट 1961) के तहत चुना गया है उनके खिलाफ उसी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। उन्हें यूपी कानून के तहत चुना गया और उन पर कार्रवाई उत्तराखंड कानून के तहत हुई जो कि गलत है।

संविधान का अनुच्छेद 243(ई) चुनी हुई पंचायत के पांच साल के कार्यकाल की बात करता है और जबतक पंचायत भंग न हो तबतक वह पांच साल तक चलती है। बीच में सदस्यता समाप्त करना एक प्रकार से पंचायत को भंग करना है जो कि असंवैधानिक है। हालांकि इस मामले में हाई कोर्ट ने नए कानून के मुताबिक पंवार की सदस्यता समाप्त मान ली थी जिसके खिलाफ पंवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
क्या है मामलामई 2014 में उत्तराखंड में पंचायत और ब्लाक चुनाव हुए थे। पंवार को पंचायत सदस्य चुना गया और बाद में वह पंचायत भटवारी के ब्लाक प्रमुख चुने गए। इस बीच 4 अप्रैल 2016 को राज्य में उत्तराखंड पंचायत राज एक्ट 2016 लागू हो गया। इसकी धारा 194 कहती है कि उत्तराखंड में जहां भी यूपी पंचायत राज एक्ट और यूपी क्षेत्रीय पंचायत एक्ट लागू हैं वो निरस्त हो जाएंगे।

5 जनवरी 2018 को ब्लाक भटवारी म्युनिसिपल बोर्ड बराहत उत्तर काशी में मिल गया। 9 अक्टूबर 2018 को एक आदेश जारी हुआ जिसमें कहा गया कि पंवार अब रेवेन्यू विलेज तिलोथ दो के मतदाता नहीं रह गए हैं और मतदाता सूची से उसका नाम हट गया है।
पंवार जिस क्षेत्र पंचायत के सदस्य थे वह क्षेत्र म्युनिसपल क्षेत्र में शामिल हो गया है इसलिए अब उनकी सदस्यता समाप्त हो गई है। चूंकि वह क्षेत्र पंचायत के सदस्य नहीं रह गए इसलिए कानूनन ब्लाक प्रमुख भी नहीं रह सकते। उन्होंने सदस्यता समाप्त करने के आदेश को पहले हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

Posted By: Arun Kumar Singh

Source: Jagran.com

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