Kumbh 2019: अपने प्राइवेट पार्ट से कैसे कार खींच लेते हैं ये नागा साधु?

प्रयागराज मे कुम्भ मेले की रौनक से पूरा शहर जगमगा रहा है. पूरे मेले को इस बार 20 अलग-अलग सेक्टरों मेन बांटा गया है. सेक्टर 16 में हम जैसे ही पहुंचे, अलग-अलग किस्म के बाबाओं से हमारा सामना हुआ. काऊबॉय टोपी वाले बाबा, 8 फीट जटाओं वाले बाबा तो कहीं एक टांग पर बरसों से खड़े बाबा. लेकिन हर बार की तरह इस बार के कुम्भ का मुखी आकर्षण तो नागा बाबा ही हैं. नागा साधु यानी शरीर पर एक भी कपड़ा ना पहनने वाले साधु. चाहे जूना अखाड़ा हो, निर्वाणी कोई भी अन्य अखाड़ा, नागा साधु इन अखाड़ों में जरूर मौजूद होते हैं. पूरे शरीर पर भस्म लगाए ये साधु आपको बुलाते हैं, आपके माथे पर भस्म लगाते हैं और दान की अपेक्षा करते हैं.इन नागा साधुओं से मिलकर एचएम आगे बढ़े ही थे कि अचानक हल्ला शुरू हो गया. भीड़ एक ओर भाग रही थी. हमने एक साधु को रोककर इस हल्ले और भगदड़ का कारण पूछा. पता चला कि एक नागा साधु को भगवान शिव का आशीर्वाद मिल गया है और ये नागा बाबा अपने लिंग से एक कार खींचने वाला है. हमारा कैमरा तुरंत हरकत में आ गया. इस तरह कि बातें हमने अभी तक सिर्फ कानों सुनीं थीं. आज पहली बार यह ‘चमत्कार’ हम अपनी आंखों से देखने वाले थे.नागा साधु को तुरंत गेंदे के फूल की मालाओं से लाद दिया गया. करीब 100 से ज्यादा लोग वहाँ जुट चुके थे. अनाउंसमेंट करने वाला पूरे ज़ोर-शोर से चिल्ला रहा था, ‘नागा बाबा को शिव जी ने दिया खास आशीर्वाद, यकीन ना हो तो खुद अपनी आंखों से देख लो’. भीड़ में आस्था कि लहर और तेज हो गई. हम भी भीड़ में घुस चुके थे.फिर शुरू हुआ असली खेल. नागा बाबा ने अपने लिंग से कार में लगी रस्सी को बांधा और ‘हर हर महादेव’ के साथ कार को खींचना शुरू कर दिया. कार कि ड्राइविंग सीट पर भी एक बाबा बैठा था. देखकर साफ समझ में आ रहा था कि गाड़ी का असली कंट्रोल तो उसके हाथ में है. लेकिन फिर भी कम से कम 150 किलो की कार को अपने लिंग से खींचना कोई आम बात तो नहीं थी. लेकिन यह कैसे संभव है? किसी भी व्यक्ति में क्या भगवान के आशीर्वाद से इतनी शक्ति आती है या इसके पीछे कॉपी दूसरा ही कारण है?कैसे कोई भी व्यक्ति अपने शरीर के सबसे नाजुक हिस्से में रस्सी बांधकर एक कार खींच सकता है?नागा साधु भी तो इंसान ही हैं ना?दरअसल नागा साधु वो साधु माने जाते हैं जो दुनियावी बातों से ऊपर उठ चुके हैं. इसीलिए उन्होने इंसानी जीवन के 3 मूलभूत बंधन रोटी कपड़ा और मकान छोड़ दिये होते हैं. हम जितने नागा साधुओं से मिले, उन्होने बताया कि उनका कोई घर नहीं होता. वो जंगलों में घूमते रहते हैं, पहाड़ों में रहते हैं और हर कुछ महीनों में अपने रहने का स्थान बदलते रहते हैं. खान-पान भी उनका बहुत संयमित होता है, ऐसा वो कहते हैं. इसी क्रम में इन लोगों ने अपने पूरे कपड़े त्याग दिये होते हैं.लेकिन इंसानी शरीर तो सभी के लिए समान है. इसीलिए किसी भी किस्म कि उत्तेजना को ना महसूस कर पाएं, इसलिए नागा साधु बनने के साथ ही लिंग की नसों को ऑपरेशन करके काट दिया जाता है. इसके बाद नागा साधुओं का लिंग सिर्फ मांस का एक टुकड़ा भर रह जाता है. यही कारण है कि नागा साधु इससे भार उठाने, गाड़ी खीचने जैसे भ्रम पैदा कर सकते हैं.ये भी पढ़ें:केके मोहम्मद: जिन्होंने कहा था अयोध्‍या में मस्जिद नहीं मंदिर था, उन्हें मिलेगा पद्मश्री सम्मान
Source: News18 News

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