ICICI फ्रॉड मामला: चंदा कोचर के खिलाफ FIR दर्ज करने वाले CBI अफसर का ट्रांसफर, जेटली ने दी थी नसीहत

India oi-Rahul Kumar |

Published: Sunday, January 27, 2019, 9:27 [IST]
नई दिल्ली। आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व एमडी और सीईओ चंदा कोचर के साथ उसके पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के वी एन धूत के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश रचने के आरोप में सीबीआई ने 22 जनवरी को एफआई दर्ज की थी। इस एफआईआर पर हस्ताक्षर करने वाले सीबीआई ने अधिकारी एसपी सुधांशु धर मिश्रा का एक दिन बाद ट्रांसफर कर दिया गया है। बता दें कि चंदा कोचर के खिलाफ चल रही जांच के मामले में केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) पर निशाना साधा है। जिसके बाद सीबीआई के अधिकारी के ट्रांसफर की खबर आई है। सीबीआई अफसर का रांची ट्रांसफर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एसपी सुधांशु धर मिश्रा जोकि सीबीआई के बैंकिंग एंड सिक्योरिटीज फ्रॉड सेल में कार्यरत थे उन्होंने 22 जनवरी को चंदा कोचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। अगले ही दिन उनका ट्रांसफऱ एजेंसी की रांची के आर्थिक अपराध शाखा में कर दिया गया। चंदा कोचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के दिन दिन बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सीबीआई को दुस्साहस से बचने और सिर्फ दोषियों पर ध्यान देने की नसीहत दी थी। अरुण जेटली ने सीबीआई पर कसा तंज केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने सीबीआई की कार्रवाई पर तंज कसाते हुए शुक्रवार को लिखे अपने ब्लॉग के जरिए कहा, हजारों किलोमीटर दूर बैठा जब मैं आईसीआईसीआई मामले में संभावित लक्ष्यों की सूची पढ़ता हूं तो एक ही बात दिमाग में आती है कि लक्ष्य पर ध्यान देने के बजाय दूसरा रास्ता क्यों चुना जा रहा है? अगर हम बैकिंग सेक्टर से हर किसी को बिना साक्ष्य के जांच में शामिल करना शुरू करेंगे तो हमें क्या हासिल होगा। असल में इससे नुकसान हो रहा है। मेरा जांच करने वालों को सुझाव है कि वे महाभारत के अर्जुन की सलाह पर गौर फरमाएं। सिर्फ मछली की आंख पर ध्यान टिकाएं। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायण को पद्म पुरस्कार मिलने पर केरल के पूर्व DGP ने उठाए सवाल यह सीबीआई का निर्णय है। सरकार का इस मामले से कुछ लेना-देना नहीं है सरकारी सूत्रों ने बताया कि जेटली की टिप्पणी केवल ‘बड़ो द्वारा दी गई सलाह’ थी, इसे एजेंसी में हस्तक्षेप के तौर पर ना लिया जाए। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने शनिवार को कहा कि, जेटली ने एक वैध तर्क दिया है। आप बिना किसी सबूत के अनुमानों के आधार पर किसी पर इतना बड़ा आरोप नहीं लगा सकते हैं। आप किसी भी सबूत के बिना बोर्ड के शीर्ष सदस्यों का नाम कैसे दे सकते हैं? सभी निर्णय लेने में बाधा आएगी। एक अधिकारी ने कहा, ‘यह सीबीआई का निर्णय है। सरकार का इस मामले से कुछ लेना-देना नहीं है। फिर भी हमें लगातार निशाने पर लिया जा रहा है।’ कांग्रेस का आरोप है कि जेटली ने सीबीआई पर दबाव बनाकर इस मामले पर धीमी चाल चलने को कहा है। CJI रंजन गोगोई ने नई AYODHYA बेंच का किया गठन, अगली सुनवाई 29 जनवरी को

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Source: OneIndia Hindi

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