जानिए उन दो महिलाओं के बारे में, जिन्होंने सबरीमाला में प्रवेश किया

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पहली बार दो महिलाएं आखिरकार सबरीमाला मंदिर में गर्भगृह तक पहुंचीं. उन्होंने भगवान अयप्पा की पूजा की. माना जा रहा है कि पुलिस ने दोनों महिलाओं को अपनी सुरक्षा में गुप्त तौर पर कहीं रखा है. जानते हैं कि ये दोनों महिलाएं हैं कौन, जिन्होंने पूरे देश में एक सनसनी फैला दी है. इनके नाम बिंदू अमिनी और कनक दुर्गा हैं. दोनों वर्किंग महिलाएं हैं. दोनों विवाहित हैं. दोनों के बच्चे हैं. दोनों को अब लगातार धमकियां मिल रही हैं.बिंदू अमिनी 42 साल की हैं. वो कन्नूर यूनिवर्सिटी में कानूनी पढाई की अस्सिटेंट प्रोफेसर हैं. करीब दस साल पहले वो कानू सान्याल के नक्सलवादी ग्रुप से जुड़ी थीं. लेकिन बाद में उन्होंने इसे छोड़ दिया. अब वो किसी सियासी पार्टी के साथ नहीं हैं. उनकी विचारधारा साफतौर पर वामपंथी है.  उन्होंने वकालत भी है.बिंदू ने कानून की पढाई में मास्टर्स डिग्री ली है. इसके बाद उन्होंने कई यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में पढाने का काम किया. इसमें कालीकट यूनिवर्सिटी शामिल है. अब वो कन्नूर यूनिवर्सिटी में लोकप्रिय टीचर हैं.सबरीमाला जाने वाले श्रद्धालुओं को करने होते हैं ये पांच कठिन कामवामपंथी ग्रुप से जुड़ींजब वो स्टूडेंट थीं, तब एक्टिविस्ट के तौर पर वामपंथी ग्रुप केरल विद्यार्थी संगठन से जुड़ीं. इसके बाद वो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एमएल) की सदस्य बनीं. इस पार्टी में वो केरल प्रदेश इकाई की सचिव भी रहीं. हालांकि इसके बाद उन्होंने राजनीति से किनारा कर लिया. बिंदू दलित एक्टिविस्ट भी हैं और लोगों के बीच लैंगिक समानता की बड़ी पैरोकार के रूप में जानी जाती हैं.वकालत की और पढाया भीLoading… दक्षिण भारत की न्यूज वेबसाइट न्यूजमिनट डॉट कॉम के अनुसार वो छात्र के रूप में जुझारू सियासी कार्यकर्ता थीं. पढाई खत्म करने के बाद उन्होंने कोयीलांदी कोर्ट में खुद को वकील के तौर पर रजिस्टर किया और वकालत शुरू की. बिंदू केरल के पतनमथित्ता जिले की रहने वाली हैं. बिंदू अमिनी कन्नूर यूनिवर्सिटी में लॉ की लोकप्रिय लेक्चरर हैंस्क्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, उनके एक वकील स्टूडेंट अश्विन कृष्णा का कहना है, वो अपने छात्रों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके मजबूत सियासी विचार होते हैं. वो हमेशा छात्रों के पक्ष में खड़ी होती रही हैं. उनके स्टूडेंट उनके जेंडर जस्टिस पर दिए जाने वाले लेक्चर को पसंद करते हैं.पति भी कॉलेज में लेक्चरर42 साल की बिंदू शादीशुदा हैं. उनके पति हरिहरन भी कॉलेज में लेक्चरर हैं. हरिहरन भी पॉलिटिकल एक्टिविस्ट हैं. उनकी एक 11 साल की बेटी भी है. उनका परिवार कोझीकोड में रहता है.पीरियड्स नहीं बल्कि ये थी सबरीमाला मंदिर में महिलाओं पर रोक की वजहसीपीआई (एमएल) के पोलित ब्यूरो के सदस्य पीजे जेम्स का कहना है, बिंदू दस साल पहले पार्टी की राज्य समिति की सदस्य थीं लेकिन उसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी. अब उनका हमसे कोई संपर्क नहीं है.इस दर्शन के बाद बिंदू का फेसबुक पेज उनके मित्रों और छात्रों की बधाइयों से भरा हुआ है.कनकदुर्गा धार्मिक महिलादूसरी महिला, जिसने सबरीमाला में प्रवेश किया, उनका नाम कनक दुर्गा है, वो 44 साल की हैं. कनक केरल राज्य सिविल सप्लाइज कारपोरेशन में अस्सिटेंट मैनेजर हैं. वो मलप्पुरम के अंगदीपुरम में पोस्टेड हैं. कनक के बारे में माना जाता है कि वो काफी धार्मिक आस्थाओं वाली महिला हैं. लगातार मंदिरों में जाती हैं.हालांकि जब उनके परिवार को पता लगा कि वो सबरीमाला जाने की योजना बना रही हैं तो परिवार ने उनका विरोध किया. वो परंपरागत तौर पर केरल के धार्मिक नायर परिवार से हैं. कनकदुर्गा केरल के सिविल सप्लाई डिपार्टमेंट में काम करती हैंफेसबुक पर हुई मुलाकातदक्षिण भारत के मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार बिंदू और कनकदुर्गा की मुलाकात फेसबुक पर हुई. दोनों फेसबुक पेज नवोतन केरलम सबरीमालायीलेकु (रेनांसा केरल) से जुड़ी हुई थीं. ये फेसबुक का वो पेज है, जिसे सबरीमाला में प्रवेश चाहने वाली महिलाओं ने बनाया है.कुंभ विशेष: ये है सबसे पुराना अखाड़ा जिसने की थी नागा परंपरा की शुरुआतकनक का परिवारकनक के पति इंजीनियर हैं. वो दो बच्चों की मां हैं. वो जिस नायर समुदाय से ताल्लुक रखती हैं. वो केरल सवर्ण वर्ग से ताल्लुक रखता है. उनके भाई भारत भूषण का कहना है कि कि कनक काफी धार्मिक हैं. उनका कहना है कि उन्हें नहीं मालूम कि उनकी बहन ने क्यों सबरीमाला जाने का फैसला किया. सबरीमाला मंदिर24 दिसंबर को भी किया था मंदिर में प्रवेश का प्रयासबिंदू और कनकदुर्गा ने 24 दिसंबर को भी सबरीमाला में जाने का प्रयास किया था लेकिन विरोधियों ने उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया था. इसके बाद बिंदू के एरोकोड स्थित घर और उनके पति के अंगदीपुरम स्थित घर पर दक्षिणपंथी समूह के लोगों ने हमला भी किया.न्यूजमिनट की रिपोर्ट के अनुसार 24 दिसंबर को मंदिर के रास्ते में कनक बेहोश हो गईं थीं लेकिन बुधवार को उनको दिक्कत नहीं हुई. जब 24 दिसंबर को कनक को सबरीमाला में विरोध प्रदर्शन के बीच लौटना पड़ा तो उन्होंने मीडिया से कहा था, हम इसके लिए लंबा इंतजार भी कर सकते हैं, प्रदर्शनकारी जो कर रहे हैं, वो उन्हें करने दें. वो हमें मंदिर में जाने से नहीं रोक सकते. ये हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है और इसलिए हम सबरीमाला आए हैं.देश की पहली टीचर, जिसने लड़कियों को अंग्रेजी पढ़ने पर जोर दियाइसके बाद ये दोनों कहां गईं, इसके बारे में किसी को नहीं पता. करीब एक सप्ताह तक वो गुप्त स्थान पर रहीं. कनक के परिवार ने तो उनके लापता होने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी. सबरीमाला मंदिरकब सबरीमाला पहुंचींमंगलवार यानि एक जनवरी की आधी रात के बाद या बुधवार को रात एक बजे वो सबरीमाला हिल पर पहुंच गईं. फिर 3.30 बजे उन्होंने मंदिर में प्रवेश किया. इसके बाद दोनों ने टेलीफोन से इंटरव्यू देकर बताया कि उन्होंने किस तरह से दर्शन कर लिया है. पुलिस ने पंपा पहुंचने के बाद दोनों को सुरक्षा मुहैया कराई. उन्हें किसी तरह के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा. इसके बाद दोनों ने मनोरमा न्यूज टीवी चैनल को भी एक इंटरव्यू दिया.गौरतलब है कि धार्मिक मान्यताओं के आधार पर इस सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. मान्यता है कि रजस्वला उम्र वाली महिलाओं को भगवान अयप्पा के सामने नहीं आना चाहिए.  सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से करीब 17 महिलाओं ने मंदिर में पहुंचने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाईं.क्यों चाह कर भी आप पूरे नहीं कर पाते नए साल के रिजोल्यूशन?
Source: News18 News

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