शहरी गरीबों को रियायती दरों पर मकान देने वाली परियोजनाएं चढ़ने लगी परवान

Publish Date:Wed, 02 Jan 2019 08:15 PM (IST)

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। शहरी गरीबों को रियायती दरों पर मकान देने की योजना को रफ्तार देने के लिए सरकार ने दो दर्जन से अधिक आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग पर बल दिया है। आवासीय परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए राष्ट्रीय शहरी आवासीय कोष का गठन किया गया है। आवास बनाने और गरीबों को सौंपने की योजना परवान चढ़ने लगी है। वर्ष 2022 तक सभी शहरी बेघर वाले गरीबों को प्राथमिकता के तौर पर मकान दे देने की योजना है।
साठ हजार करोड़ की लागत से राष्ट्रीय शहरी आवासीय कोष गठित
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने शहरी क्षेत्रों के गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रियायती दरों पर मकान बनाए जा रहे हैं। एक आंकड़े के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर अब तक 68.5 लाख आवास बनाने की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
शहरी विकास सचिव दुर्गा शंकर मिश्र का कहना है कि इतने अधिक मकान बनाने की योजना के पूरा होने पर रोजगार के अत्यधिक अवसर सृजित होंगे। आवासीय क्षेत्र में कुल 3.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना को देखते हुए बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

आवासीय परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ने से रीयल इस्टेट क्षेत्र से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में विकास होगा। मंजूरी प्राप्त आवासीय प्रस्तावों में से 36 लाख मकान निर्माणाधीन हैं, जबकि 12 लाख मकान बनकर तैयार हो चुके हैं। इन मकानों को बनाने के लिए कुल 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक धनराशि जारी की जा चुकी है। राष्ट्रीय शहरी आवासीय कोष के लिए 60 हजार करोड़ रुपये का कोष गठित किया गया है। इससे आवासीय परियोजनाएं वित्तीय संकट में नहीं फसेंगी।
आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मकान बनाने के लिए सरकार की सब्सिडी योजना बहुत कारगर साबित हो रही है। इसके तहत अब तक सात करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी गई है। जबकि इससे तीन करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मदद दी गई है। सरकार की मंशा वर्ष 2020 तक एक करोड़ मकान बनाने की है। जबकि वर्ष 2022 तक सबको मकान देने का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।

Posted By: Bhupendra Singh

Source: Jagran.com

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