अमेरिका को संचार उपकरणों के शुल्क मुक्त आयात की इजाजत नहीं

Publish Date:Sat, 01 Dec 2018 08:39 PM (IST)

नितिन प्रधान, नई दिल्ली। अमेरिका को रेडियो रिसीवर, महंगे मोबाइल फोन, इनके पा‌र्ट्स और स्मार्ट वाच जैसे संचार उपकरणों के शुल्क मुक्त आयात की इजाजत मिलने की संभावना ना के बराबर है। इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने वाणिज्य मंत्रालय को भेजी अपनी राय में स्पष्ट कर दिया है कि इस विषय पर सहमति की कोई संभावना नहीं है।
आइटी उत्पादों के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी आइटी मंत्रालय को है आपत्ति
अमेरिका ने भारत से ऐसे उपकरणों को शुल्क मुक्त आयात की श्रेणी में डालने को कहा था। अमेरिका के ट्रेड डिपार्टमेंट ने वाणिज्य मंत्रालय को भेजे पत्र में इस बात पर चिंता जतायी थी कि भारत सितंबर 2018 तक इस बात की व्यवस्था कर देगा। इन उत्पादों में टेलीकॉम नेटवर्क इक्विपमेंट मसलन स्विच और रूटिंग उपकरण शामिल हैं। सूचना व संचार से जुड़े इन उपकरणों के आयात को लेकर वाणिज्य मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से राय मांगी थी।
इन उत्पादों और उपकरणों को लेकर इलेक्ट्रॉनिक व आइटी मंत्रालय ने अपनी राय से वाणिज्य मंत्रालय को अवगत करा दिया है। सूत्रों के मुताबिक अपनी राय में आइटी मंत्रालय ने कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक व आइटी उत्पादों के शुल्क मुक्त आयात के पक्ष में नहीं है। इन उत्पादों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला अंतर मंत्रालयी समिति की सिफारिश पर हुआ था। इस समिति में राजस्व, वाणिज्य, दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक व आइटी विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे।

अमेरिका ने आयात किये जाने वाले ऐसे उत्पादों की लैब जांच के मामले में भी भारत सरकार से चिंता जतायी थी। अमेरिका चाहता है कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) अंतरराष्ट्रीय मानकों पर काम करने वाली कुछ लैब को मान्यता दे ताकि वहां से उत्पादों को सर्टिफाई यानी प्रमाणित कराया जा सके, लेकिन आइटी मंत्रालय इसके लिए तैयार नहीं है।
मंत्रालय का कहना है कि इससे बीआइएस के सर्टिफिकेशन से पूर्व ही ऐसे उत्पादों का आयात संभव हो जाएगा। इसलिए यह जांच आयात से पहले सैंपल की जांच सीधे बीआइएस की तरफ से ही होनी चाहिए। मंत्रालय ने कहा है कि यद्यपि लैब को मान्यता देना बीआइएस के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन बीआइएस एक्ट 1986 के मुताबिक किसी भी मैन्यूफैक्चरर के लिए अपने उत्पाद को बीआइएस की लैब से ही प्रमाणित कराना जरूरी है।

अमेरिका यह भी चाहता है कि बीआइएस मॉडल के आधार पर सभी मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों में निर्मित उत्पादों के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध कराए। उसका लाभ यह होगा कि बीआइएस उस संख्या के तहत निर्मित किसी भी मैन्यूफैक्चरिंग इकाई के उत्पाद का परीक्षण कर सकेगा।
आइटी मंत्रालय का मानना है कि यह बीआइएस के क्षेत्राधिकार का मसला है और वाणिज्य मंत्रालय को इस पर उसी की राय लेनी चाहिए। अलबत्ता मंत्रालय का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक व आइटी क्षेत्र के अधिसूचित उत्पादों के रजिस्ट्रेशन के लिए साल 2012 के आदेश के तहत ब्रांड ओनर के आधार पर रजिस्ट्रेशन का कोई प्रावधान नहीं है।

Posted By: Bhupendra Singh

Source: Jagran.com

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